कोलकाता: सौरव गांगुली ने गुरूवार को कहा कि उन्होंने भविष्य की योजना के बारे में अभी तक विचार नहीं किया है. लोढा पैनल ने साफ कर दिया है कि गांगुली को अगर बीसीसीआई या राज्य ईकाईयों में पदाधिकारी बनना है तो उन्हें जून के बाद तीन साल का अनिवार्य ब्रेक लेना होगा.
गांगुली इस समय बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अभी किसी भी चीज के बारे में नहीं सोचा है. देखेंगे कि क्या करना है.’’ इस पूर्व भारतीय कप्तान ने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज कर दिया कि उन्होंने कैब अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ऐसा नहीं किया है. ’’
बीते दिन ही लोढ़ा समिति ने प्रशासनिक सुधारों को लेकर पूछे गए सवालों पर सात बिंदू बोर्ड के लिए अनिवार्य बनाते हुए स्पष्ट किया कि बीसीसीआई के बर्खास्त सचिव अजय शिर्के बीसीसीआई की बैठकों में महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि नहीं हो सकते.
इन बिंदुओं में सातवां और सबसे अहम सवाल प्रत्यक्ष रूप से गांगुली से जुड़ा था जिनके नाम की अध्यक्ष पद के लिए अटकलें लगाई जा रही हैं. लेकिन अगर लोढा समिति के जवाब को सही तरह से समझा जाए तो वह बीसीसीआई अध्यक्ष बन सकते हैं लेकिन सिर्फ कुछ महीने के लिए. सवाल नंबर सात: अगर कोई व्यक्ति किसी राज्य-सदस्य संघ में दो साल से पदाधिकारी है तो क्या वह तीन साल के ब्रेक का नियम लागू हुए बिना अगले चुनाव में उम्मीदवारी का पात्र है. अगर हां तो उसका कार्यकाल कितना होगा.
जवाब: अगर चुनाव के समय मौजूदा पदाधिकारी ने तीन साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है तो वह चुनाव लड़ने का पात्र है, हालांकि उसका कार्यकाल पूरा नहीं होगा और लगातार तीन साल का समय पूरा होते ही उसे तुरंत पद छोड़ना होगा. संभावित गलत इस्तेमाल से बचने के लिए ऐसा किया गया है. उदाहरण के लिए अगर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं होगा तो कोई पदाधिकारी दो साल और नौ महीने के बाद इस्तीफा दे सकता है और तीन महीने बाद अगले चुनाव में इस आधार पर पात्रता का दावा कर सकता है कि नया कार्यकाल शुरू होगा.