नई दिल्ली: 11 जून से शुरू हो रहे जिम्बाबे दौरे को लेकर अभी से कई तरह की अटकले लगाई जा रही हैं ये अटकले हैं वनडे टीम के कप्तान महेंन्द्र सिंह को लेकर है. भारतीय क्रिकेट के सबसे सफलतम कप्तानों में से एक धोनी की कप्तानी को लेकर कई बार सवाल उठाए जा रहे है. टीम इंडिया के डायरेक्टर रह चुके रवि शास्त्री ने अपने हालिया बयान में यह कहा था की धोनी के जगह विराट कोहली को तीनों फॉर्मेट का कप्तान बना देना चाहिए. ऐसे में मौजूदा कप्तान महेंन्द्र सिंह धोनी पर जिम्बाबे दौरे पर काफी दबाव होगा.
क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि धोनी का हाल कही भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की तरह ना हो जाए.
गांगुली के लिए भी जिम्बाब्वे दौरा उनके करियर का सबसे खराब दौरा साबित हुआ था. मौजूदा वनडे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी पहली बार बतौर कप्तान जिम्बाब्वे दौरे पर जा रहे हैं.
आपको बता दे कि कैसे धोनी और गांगुली की राह एक-दूसरे से मिलती हुई नजर आ रही है. पिछले कुछ समय से कप्तान धोनी की कप्तानी सवालों के घेरे में है. ये दौरा धोनी के लिए उनकी कप्तानी बचाने का आखिरी मौका भी हो सकता है और सबसे बड़ी मुसीबत भी क्योंकि यहां एक मैच में भी हार मिली तो धोनी की कप्तानी पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो सकता है.
साल 2005 में जब सौरव गांगुली ने जिम्बाब्वे का दौरा किया था तब गांगुली के लिए भी हालात कुछ ऐसे ही थी.
जब गांगुली कप्तान थे तब वहां टीम इंडिया को 2 मैच की टेस्ट सीरीज और 3 मैच की वनडे सीरीज खेलनी थी. उस वक्त गांगुली की कप्तानी खतरे में थी क्योंकि कोच ग्रेग चैपल और गांगुली में सबकुछ ठीक नहीं था. चैपल गांगुली को कप्तानी छोड़ने के लिए कह रहे थे और उनकी जगह प्लेइंग इलेवन में किसी युवा को शामिल करना चाहते थे.
वहीं गांगुली अपनी कप्तानी किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहते थे. पहले टेस्ट में उन्होंने शतक लगाकर चैपल को करारा जवाब भी दिया था. बतौर कप्तान गांगुली ने टेस्ट और वनडे दोनों ही सीरीज अपने नाम की.
बावजूद इसके जब वो भारत वापस आए तो चैपल ने उनके खिलाफ बीसीसीआई को ईमेल कर अपनी शिकायत दर्ज की और जिसके बाद भारतीय क्रिकेट में भूचाल आ गया. जिम्बाब्वे दौरे के बाद ही गांगुली को कप्तानी से हटा दिया गया और उनकी जगह राहुल द्रविड़ को कमान सौंप दी गई.
धोनी भी अपनी कप्तानी बचाने में लगे हैं. वो भी जिम्बाब्वे दौरे पर जा रहे हैं पूर्व टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री पहले ही धोनी से कप्तानी छीन लिए जाने की बात कह चुके हैं. ऊपर से अब बीसीसीआई भी धोनी पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करती. ऐसे में धोनी के खिलाफ हार से लेकर टीम के साथ तालमेल तक सभी को मुद्दा बनाकर उन्हें कप्तानी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है.