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1 अप्रैल से बदल जाएगा डिजिटल ट्रांजेक्शन का तरीका, जानें क्या होगा बदलाव

नीलेश ओझा   |  29 Mar 2026 12:19 PM (IST)
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RBI का जोर अब टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) पर है. जिसे अब हर छोटे-बड़े डिजिटल भुगतान के लिए जरूरी कर दिया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब आपको अपनी पहचान साबित करने के लिए दो अलग-अलग लेवल पार करने होंगे.

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पहले जहां कई ऐप्स पर सिंगल क्लिक से पैसे कट जाते थे. वहीं अब आपको अपनी ओनरशिप कन्फर्म करने के लिए डबल सिक्योरिटी चेक से गुजरना होगा. जिससे अनचाहे पेमेंट्स पर रोक लगेगी. नए नियमों के मुताबिक अब बैंक और फिनटेक कंपनियों को ग्राहकों को ऑथेंटिकेशन के कई ऑप्शन देने होंगे.

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जिसमें कम से कम एक फैक्टर डायनेमिक होना जरूरी है. डायनेमिक का मतलब है कि वह सुरक्षा कोड हर बार नया होगा और तुरंत जेनरेट होगा. अगर बैंक इन नियमों को लागू करने में कोई ढील बरतते हैं और किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी होती है. तो अब इसकी पूरी जिम्मेदारी सर्विस देने वाले बैंक या कंपनी की होगी.

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अब पासवर्ड या पिन के साथ-साथ ओटीपी, फिंगरप्रिंट जैसे बायोमीट्रिक्स या हार्डवेयर टोकन का तालमेल बिठाया जाएगा. हम में से ज्यादातर लोग सालों से एक ही स्टैटिक पिन चला रहे थे. जिसे हैकर्स आसानी से ट्रैक कर लेते थे. लेकिन अब हर ट्रांजेक्शन के लिए एक नया रियल-टाइम कोड आएगा. जिससे अगर किसी को आपका पासवर्ड पता भी चल जाए. तो भी वह आपके खाते में सेंध नहीं लगा पाएगा.

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अब यह पूरी तरह से आपकी पसंद पर निर्भर करेगा कि आप सुरक्षा का कौन सा तरीका चुनना चाहते हैं. बैंक आपको कई कॉम्बो ऑफर करेंगे. जैसे आप ओटीपी के साथ अपना पुराना पिन इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर फिंगरप्रिंट के साथ डिवाइस बाइंडिंग जैसा हाई-टेक ऑप्शन चुन सकते हैं.

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टोकन बेस्ड ऑथेंटिकेशन और पासवर्ड का कॉम्बो भी एक बढिया ऑप्शन होगा. जिससे ग्राहकों को अपनी सुविधा के हिसाब से सेफ्टी चुनने की पूरी आजादी मिलेगी. इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर आम आदमी को होने वाला है, जो अक्सर फिशिंग अटैक या अनअथॉराइज्ड ट्रांजैक्शंस का शिकार हो जाता है.

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