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PNG: कहां से आती है पाइपलाइन वाली गैस, जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी टेक्नोलॉजी?

एबीपी टेक डेस्क   |  29 Mar 2026 10:05 AM (IST)
PNG: कहां से आती है पाइपलाइन वाली गैस, जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी टेक्नोलॉजी?

देश में बढ़ती गैस की कीमतों और सिलेंडर की झंझट से परेशान लोग अब तेजी से PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस की ओर बढ़ रहे हैं. आज कई शहरों में बिना सिलेंडर के ही गैस सीधे घर के किचन तक पाइपलाइन के जरिए पहुंच रही है. यह सिस्टम देखने में जितना आसान लगता है इसके पीछे उतनी ही लंबी और आधुनिक प्रोसेस काम करती है जो गैस को सुरक्षित तरीके से आपके घर तक लाती है.

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PNG असल में एक नैचुरल ईंधन है जो मुख्य रूप से मीथेन गैस से बना होता है. यह साफ-सुथरा, कम प्रदूषण फैलाने वाला और पारंपरिक LPG के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इसी वजह से अब इसका इस्तेमाल सिर्फ खाना बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि पानी गर्म करने और अन्य घरेलू जरूरतों में भी होने लगा है.

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इस गैस की शुरुआत जमीन के अंदर मौजूद प्राकृतिक भंडारों से होती है. ड्रिलिंग के जरिए इसे बाहर निकाला जाता है लेकिन शुरुआत में यह पूरी तरह शुद्ध नहीं होती. इसके बाद इसे प्रोसेसिंग प्लांट में भेजा जाता है जहां इसमें मौजूद हानिकारक तत्व जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर को अलग किया जाता है. शुद्ध होने के बाद यह गैस उपयोग के लिए तैयार हो जाती है.

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इसके बाद गैस को हाई-प्रेशर पाइपलाइनों के जरिए अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुंचाया जाता है. ये पाइपलाइन जमीन के नीचे बिछाई जाती हैं और इनकी लगातार निगरानी की जाती है ताकि किसी भी तरह की समस्या को तुरंत पकड़ा जा सके.

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जब गैस शहर तक पहुंचती है तो इसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में भेजा जाता है. यहां इसका दबाव कम किया जाता है और फिर छोटे पाइपों के जरिए इसे अलग-अलग इलाकों और घरों तक पहुंचाया जाता है. हर घर में एक अलग कनेक्शन दिया जाता है जिसमें गैस मीटर लगा होता है. यही मीटर यह तय करता है कि आपने कितनी गैस इस्तेमाल की है और उसी के हिसाब से बिल बनता है.

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घर के अंदर गैस एक पतली पाइप के जरिए सीधे चूल्हे तक पहुंचती है. चूल्हे के पास एक वाल्व होता है जिसे बंद करने पर गैस की सप्लाई तुरंत रुक जाती है. दिलचस्प बात यह है कि प्राकृतिक गैस में खुद कोई गंध नहीं होती इसलिए सुरक्षा के लिए इसमें एक खास केमिकल मिलाया जाता है जिससे लीकेज होने पर तुरंत पता चल सके.

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सुरक्षा के लिहाज से इस पूरे सिस्टम में कई स्तरों पर निगरानी रखी जाती है. पाइपलाइनों में ऑटोमैटिक वाल्व और प्रेशर कंट्रोल सिस्टम लगे होते हैं जो किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत काम करते हैं. अगर कहीं लीकेज होता भी है तो यह गैस हवा में जल्दी फैल जाती है जिससे खतरा कम हो जाता है.

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यही वजह है कि PNG आज के समय में एक सुविधाजनक, सुरक्षित और किफायती विकल्प बनकर उभर रहा है. इसमें न सिलेंडर खत्म होने की चिंता रहती है और न ही बार-बार बुकिंग का झंझट जिससे लोगों की जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है.

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