पठानकोट से लेकर ताज और फिर पहलगाम...ये हैं आतंक की सबसे खौफनाक तस्वीरें, देखकर फट पड़ेगा कलेजा
मुंबई हमला (2008)- समंदर के रास्ते से आया था कहर. पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने 60 घंटों तक मुंबई को बंधक बना लिया था. ताज होटल, सीएसटी स्टेशन, नरीमन हाउस, हर जगह खून ही खून. 166 जानें गईं और पूरी दुनिया ने हिंदुस्तान का जख्मी चेहरा देखा.
पठानकोट एयरबेस हमला (2016)- देश की सैन्य छाती पर किया गया सीधा वार था. आतंकी बेस में घुसे और घंटों तक फौज से लोहा लिया. 7 जवान शहीद हुए, लेकिन हर गोली ने जवाब दिया...हम जिंदा हैं और झुकेंगे नहीं.
उरी हमला (2016)- एक ही साल में दूसरा हमला. सुबह-सुबह सोते हुए जवानों पर बरसाई गई थी आग. 19 वीर सपूत सोते-सोते शहीद हो गए थे. भारत ने पहली बार “सर्जिकल स्ट्राइक” से जवाब दियाथा और कहा था...चुप नहीं रहेंगे, अब घर में घुसकर मारेंगे.
पुलवामा हमला (2019)- CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला, 40 जवान शहीद हुए थे. सड़क पर बिखरे शरीर और खून ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. आंखों में आंसू थे, लेकिन दिलों में आग भी थी. बदले की गूंज बालाकोट तक पहुंची थी.
अमरनाथ यात्रा हमला (2017)- श्रीनगर से लौटते श्रद्धालुओं की बस पर आतंकियों ने बरसाई थी गोलियां. 7 श्रद्धालु मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे. धार्मिक आस्था पर हमला, लेकिन आस्था टूटी नहीं. जवाब हर साल लाखों की भीड़ में मिलता है.
दिल्ली संसद हमला (2001)- लोकतंत्र के मंदिर में गोलियों की गूंज. आतंकियों ने संसद को निशाना बनाया, लेकिन बहादुर जवानों ने उन्हें संसद के भीतर घुसने नहीं दिया. देश की रग-रग कांप उठी उस दिन. हमलावर था जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा. 9 लोगों की मौत हुई थी.
पहलगाम हमला 22 अप्रैल 2025 - ताजा हमले में फिर से कश्मीर की वादियों में खून फैला गया. पहलगाम की शांत घाटियों में जब गोलियां चलीं, तो सैलानियों की चीखें और फौज की गूंज दोनों सुनाई दीं. घाटी एक बार फिर डर में सिमट गई. दावा किया जा रहा है कि आतंकियों ने नाम पूछ पूछकर गोलियां मारी.