आपका Wi-Fi हैकर्स के निशाने पर! तुरंत बदल दें ये 3 सेटिंग्स, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

आज के समय में ज्यादातर लोग मानते हैं कि अगर उनके वाई-फाई का पासवर्ड लंबा और स्ट्रांग है तो उनका नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार केवल पासवर्ड के भरोसे नेटवर्क को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता. असल सुरक्षा आपके राउटर की उन सेटिंग्स पर निर्भर करती है जो पूरे नेटवर्क की निगरानी और कंट्रोल करती हैं. यदि इन सेटिंग्स को सही तरीके से प्रबंधित नहीं किया गया तो हैकर्स आपके नेटवर्क में आसानी से सेंध लगा सकते हैं.
कई लोग वाई-फाई का पासवर्ड तो बदल देते हैं लेकिन राउटर के एडमिन अकाउंट का डिफॉल्ट यूजरनेम और पासवर्ड वर्षों तक वैसे ही रहने देते हैं. यही लापरवाही साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान रास्ता बन जाती है. राउटर का एडमिन पैनल पूरे नेटवर्क का कंट्रोल सेंटर होता है और यदि कोई इसमें प्रवेश कर लेता है तो वह नेटवर्क की सेटिंग्स बदल सकता है डिवाइसों की निगरानी कर सकता है और इंटरनेट ट्रैफिक को भी प्रभावित कर सकता है.
इसलिए राउटर के एडमिन पेज में लॉगिन करके डिफॉल्ट क्रेडेंशियल्स को तुरंत बदल देना चाहिए. साथ ही रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन जैसी सुविधाओं को बंद रखना बेहतर होता है खासकर तब जब उनकी जरूरत न हो.
कई बार यूजर्स यह सोचकर पुराने राउटर का इस्तेमाल जारी रखते हैं कि वह अभी भी ठीक से इंटरनेट चला रहा है. हालांकि किसी डिवाइस का सही काम करना यह साबित नहीं करता कि वह सुरक्षित भी है. जब किसी राउटर का आधिकारिक सपोर्ट समाप्त हो जाता है तब निर्माता उसके लिए सुरक्षा अपडेट जारी करना बंद कर देता है.
ऐसी स्थिति में साइबर अपराधी पुराने सेफ्टी लूप्स का फायदा उठाकर राउटर में मैलवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं. इससे आपका नेटवर्क अनजाने में अवैध ऑनलाइन एक्टिविटी का हिस्सा बन सकता है. सुरक्षा बनाए रखने के लिए फर्मवेयर अपडेट नियमित रूप से इंस्टॉल करना जरूरी है. इसके अलावा पुराने सुरक्षा प्रोटोकॉल की जगह WPA3-Personal एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. WPS और UPnP जैसी सुविधाओं को भी बंद रखना चाहिए क्योंकि इनका दुरुपयोग अपेक्षाकृत आसान होता है.
स्मार्ट टीवी, सीसीटीवी कैमरा, स्मार्ट बल्ब और अन्य स्मार्ट होम डिवाइस आज लगभग हर घर का हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन इन डिवाइसों को समय पर अपडेट न करने की आदत नेटवर्क सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है. यदि कोई स्मार्ट डिवाइस हैक हो जाता है तो हमलावर उसी के जरिए आपके कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य महत्वपूर्ण डिवाइसों तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं.
ऐसे जोखिम को कम करने के लिए स्मार्ट डिवाइसों को मुख्य नेटवर्क से अलग रखना बेहतर ऑप्शन है. इनके लिए अलग गेस्ट नेटवर्क बनाया जा सकता है जिससे संवेदनशील डिवाइस और निजी डेटा सुरक्षित रहते हैं. इसके अलावा क्लाइंट आइसोलेशन जैसी सुविधा एक्टिव करने से नेटवर्क पर मौजूद डिवाइस एक-दूसरे तक सीधे पहुंच नहीं बना पाते जिससे डेटा चोरी का खतरा कम हो जाता है.
घर के नेटवर्क को सुरक्षित रखना केवल मजबूत वाई-फाई पासवर्ड लगाने तक सीमित नहीं है. एडमिन सेटिंग्स की समीक्षा करना, डिफॉल्ट कॉन्फिगरेशन बदलना, पुराने राउटर को अपग्रेड करना और स्मार्ट डिवाइसों को अलग नेटवर्क पर रखना ऐसे कदम हैं जो साइबर हमलों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं.