दुनिया में किस देश के पास है सबसे खतरनाक मिसाइल, ऐसी तकनीक जिससे बड़े-बड़े देशों के छूट जाते हैं पसीने
रूस का RS-28 Sarmat (जिसे मीडिया में कभी-कभी Satan II कहा जाता है) एक सुपर-हेवी ICBM है बहुत भारी, लंबी रेंज वाला और बड़े पेलोड के साथ. इसकी रेंज और विरियता इतनी है कि यह दुनिया के किसी भी कोने को निशाना बना सकता है और एक ही लॉन्च में कई वारहेड (MIRV) या हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन ले जा सकता है. इसकी खासियतों के कारण इसे अधिकांश विशेषज्ञ बेहद सक्षम और खतरनाक मानते हैं.
Avangard हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन है जो पारंपरिक मिसाइल रक्षा सिस्टम को धोखा दे सकता है. यह बेहद तेज गति से (हाइपरसोनिक) उड़ते हुए अपनी ऊंचाई और दिशा बदल सकता है जिससे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है. इस तरह की गतिशीलता और अनिश्चित मार्ग सेफ्टी सिस्मट के लिए चुनौती खड़ी कर देती है.
चीन का DF-41 एक ठोस-ईंधन पर चलने वाली, रोड-और रेल-पर तैनात की जा सकने वाली ICBM है जो बड़ी दूरी तक पहुँच सकती है और कई अलग लक्ष्यों पर अलग-अलग वारहेड दे सकती है (MIRV). इसकी मोबाइल प्रकृति और तेज लॉन्च क्षमता इसे अधिक लचीला और कठिन-टार्गेट बनाती है.
ट्राइडेंट II D5 एक सबमरीन-लॉन्चेड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है जो समुद्र-आधारित न्यूक्लियर त्रि-स्थापना (nuclear triad) का अहम हिस्सा है. इसकी सटीकता, विश्वसनीयता और समुद्री बेसिंग इसे रणनीतिक रूप से घातक और बचाव-योग्य बनाती है.
इन मिसाइलों का खतरनाक होना केवल उनकी रेंज से नहीं आता बल्कि इससे कि वे एक साथ कई वारहेड ले जा सकती हैं, एंट्री-फेज में कम ट्रैकिंग विंडो रखती हैं, और हाइपरसोनिक या गाइडेड उपकरणों की वजह से मिसाइल-रक्षा प्रणालियों को मात दे सकती हैं. यही कारण है कि बड़े देश और उनके रक्षा विश्लेषक इनके विकास और तैनाती पर बेहद सतर्क रहते हैं.
किसी भी मिसाइल को उसकी रेंज, सटीकता, पेलोड, तैनाती के तरीके ही उसे खतरनाक बनाते हैं. ऐसे में वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में RS-28 Sarmat, Avangard और DF-41 जैसे सिस्टम इसलिए अलग दिखाई देते हैं क्योंकि उनकी संयुक्त क्षमताएं मिसाइल रक्षा और वैश्विक रणनीति दोनों को चुनौती देती हैं.