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सेकंड हैंड फोन लेने से पहले रुकिए! एक छोटी सी वेरिफिकेशन गलती करा सकती है बड़ा नुकसान

एबीपी टेक डेस्क   |  27 Jan 2026 10:13 AM (IST)
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सेकंड हैंड फोन खरीदते समय सबसे बड़ी गलती होती है उसकी सही तरह से वेरिफिकेशन न करना. हो सकता है वह फोन चोरी का हो, ब्लैकलिस्टेड हो या फिर उस पर किसी और का आईडी अकाउंट पहले से लिंक हो. ऐसे फोन पर नेटवर्क बंद हो सकता है, सिम काम करना बंद कर सकती है या फिर कानूनी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं. इसलिए फोन का इतिहास जानना बेहद जरूरी हो जाता है.

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हर मोबाइल फोन का एक यूनिक IMEI नंबर होता है जिससे उसकी पहचान की जाती है. फोन खरीदने से पहले *#06# डायल करके IMEI नंबर निकालें और उसे सरकारी या भरोसेमंद पोर्टल पर चेक करें. इससे पता चल जाता है कि फोन चोरी का तो नहीं है या किसी शिकायत में तो दर्ज नहीं है. अगर IMEI ब्लॉक हुआ निकला तो ऐसा फोन लेना सीधे-सीधे नुकसान को बुलावा देना है.

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सेकंड हैंड फोन में अक्सर पुराने यूजर का Google या Apple अकाउंट लॉग-इन रह जाता है. अगर फोन पूरी तरह से रीसेट नहीं हुआ है तो आगे चलकर वह लॉक भी हो सकता है. खरीदने से पहले यह पक्का कर लें कि फोन फैक्ट्री रीसेट हो चुका हो और कोई भी पुराना अकाउंट उसमें मौजूद न हो. वरना फोन आपके हाथ में होते हुए भी आपके काम का नहीं रहेगा.

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केवल सॉफ्टवेयर ही नहीं, हार्डवेयर की जांच भी उतनी ही जरूरी है. फोन की बैटरी, कैमरा, स्पीकर, माइक्रोफोन और चार्जिंग पोर्ट अच्छे से टेस्ट करें. कई बार बाहर से फोन ठीक दिखता है लेकिन अंदर से उसमें खराबी छुपी होती है जिसका पता बाद में चलता है और रिपेयर में मोटा खर्च आ जाता है.

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सेकंड हैंड फोन खरीदना गलत नहीं है लेकिन बिना वेरिफिकेशन के खरीदना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. अगर आप थोड़ी सी समझदारी दिखाएं और ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखें तो आप न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं बल्कि भविष्य की बड़ी परेशानियों से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं. याद रखें जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में भारी नुकसान करा सकता है.

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