सोते वक्त लंबे समय से गिर रही है लार तो हो जाएं सावधान, हो सकती है ये गंभीर बीमारी
जो लोग अक्सर करवट लेकर या पेट के बल सोते हैं, उनमें लार गिरने की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. इस पोजीशन में मुंह पूरी तरह बंद नहीं रहता और गुरुत्वाकर्षण की वजह से मुंह में बनी लार बाहर निकल आती है. अगर आप पीठ के बल सोने की आदत डाल लें, तो इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
जब किसी को जुकाम, एलर्जी या साइनस की समस्या होती है, तो नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है. मुंह खुला रहने के कारण सोते समय लार बाहर टपकने लगती है. सर्दी-जुकाम के दिनों में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है.
अगर आपको अक्सर सीने में जलन, खट्टी डकार या गले में जलन महसूस होती है, तो यह एसिड रिफ्लक्स का संकेत हो सकता है. इस स्थिति में शरीर ज्यादा मात्रा में लार बनाता है ताकि पेट के एसिड के असर को कम किया जा सके. यही अतिरिक्त लार सोते समय मुंह से बाहर निकलने लगती है.
कुछ दवाएं, खासकर डिप्रेशन, मानसिक तनाव या न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में दी जाने वाली दवाएं, लार ज्यादा बनने का कारण बन सकती हैं. अगर किसी नई दवा को शुरू करने के बाद यह समस्या बढ़ी है, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से जरूर बात करें.
अगर व्यक्ति को लार या खाना निगलने में दिक्कत होती है, तो लार मुंह में जमा होकर बाहर आने लगती है. पार्किंसन, स्ट्रोक या मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों में मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे यह समस्या देखने को मिल सकती है.
अगर सोते समय तेज खर्राटे आते हैं, बार-बार नींद टूटती है, सुबह सिरदर्द या थकान महसूस होती है और साथ ही मुंह से लार भी गिरती है, तो यह स्लीप एपनिया का लक्षण हो सकता है. यह एक गंभीर नींद से जुड़ी बीमारी है, जिसमें सोते समय सांस रुक-रुक कर चलती है और समय पर इलाज न होने पर दिल से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं.