कुछ सालों बाद स्लो क्यों हो जाते हैं स्मार्टफोन? जान लीजिए असली वजह

नया-नया फोन लेते हैं तो एक दम स्मूद चलता है. ऐप्स टैप करते ही खुल जाते हैं और बैटरी भी लंब टाइम तक चलती है. लेकिन जैसे-जैसे फोन पुराना होता है रुक-रुक कर चलने लगता है. ऐप्स बीच-बीच में अटक जाने लगते हैं. कई लोगों को लगता है फोन की RAM इसके पीछे जिम्मेदार होती है. लेकिन असली कारण क्या होता है बहुत से लोगों को नहीं पता होता.
हर स्मार्टफोन में एक इंटरनल स्टोरेज होती है. जिसमें हम फोटो, वीडियो और न जाने क्या-क्या भरते रहते हैं. जैसे-जैसे यह मेमोरी फुल होने लगती है फोन का प्रोसेसर हांफने लगता है. उसे डेटा ढूंढने और प्रोसेस करने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है. जब फोन की मेमोरी कैपेसिटी के आखिरी छोर तक पहुंच जाती है. तो सिस्टम जल्दी काम नहीं कर पाता और फोन की रफ्तार धीमी पड़ जाती है.
स्मार्टफोन कंपनियां और ऐप्स आए दिन नए अपडेट्स भेजते रहते हैं. यह अपडेट्स सेफ्टी और नए फीचर्स के लिए अच्छे होते हैं. लेकिन इनका एक दूसरा पहलू भी होता है नए सॉफ्टवेयर हमेशा भारी-भरकम डिजाइन और ज्यादा प्रोसेसिंग पावर की मांग करते हैं. पुराना हार्डवेयर जब इन नए और भारी ऐप्स के बोझ को नहीं संभाल पाता तो फोन की परफॉर्मेंस अपने आप नीचे आ जाती है और फोन धीमा हो जाता है.
हम फोन में दर्जनों ऐसे ऐप्स इंस्टॉल कर लेते हैं जिनकी हमें महीने में एक बार भी जरूरत नहीं पड़ती. यह ऐप्स सिर्फ स्क्रीन पर ही नजर नहीं आते बल्कि बैकग्राउंड में चुपचाप चालू रहते हैं. यह इंटरनेट का डेटा चूसने के साथ-साथ रैम और प्रोसेसर का इस्तेमाल भी करते रहते हैं. जब एक साथ कई छिपे हुए ऐप्स बैकग्राउंड में चलते हैं. तो मेन ऐप को चलाने के लिए प्रोसेसर के पास ताकत ही नहीं बचती.
स्मार्टफोन के धीमा होने में इंटरनेट और ब्राउजिंग का भी बड़ा हाथ है. जब हम रोज क्रोम या किसी दूसरे ब्राउजर पर सर्फिंग करते हैं तो ढेरों कैशे फाइलें, कुकीज और जंक डेटा फोन के कोने-कोने में इकट्ठा हो जाता है. यह धीरे-धीरे फोन की स्पीड को कम करता रहता है. अगर समय-समय पर इस डिजिटल कचरे की सफाई न की जाए. तो फोन का सिस्टम स्लो हो जाता है
बैटरी का पुराना होना भी फोन स्लो होने की एक बड़ी वजह है. लिथियम-आयन बैटरी जैसे-जैसे पुरानी होती है उसकी कैपेसिटी और पावर देने की ताकत कम होने लगती है. फोन का प्रोसेसर हमेशा एक तय वोल्टेज पर काम करना चाहता है लेकिन कमजोर बैटरी से पूरा करंट न मिलने पर प्रोसेसर खुद की स्पीड को धीमा कर लेता है. यह सेफ्टी का तरीका होता है जिससे फोन अचानक बंद न हो लेकिन इससे फोन बहुत स्लो होता जात है.
फोन में उठने वाली गर्माहट भी इसकी स्पीड को कम कर देती है. लंबे समय तक गेम खेलने या भारी ऐप्स चलाने से फोन का प्रोसेसर गर्म होने लगता है. इस ओवरहीटिंग से बचने के लिए फोन खुद-ब-खुद अपनी स्पीड कम कर देता है. जिसे थर्मल थ्रॉटलिंग कहते हैं. अगर आपका फोन आए दिन गर्म रहता है तो समझ लीजिए कि उसकी अंदरूनी कैपेसिटी और स्पीड दोनों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है.
सेंसर और हार्डवेयर पार्ट्स भी वक्त के साथ पुराने होने लगते हैं. फोन का मदरबोर्ड, रैम चिप और स्टोरेज यूनिट लगातार इस्तेमाल और तापमान के उतार-चढ़ाव से कमजोर होने लगते हैं. भले ही फोन बाहर से बिल्कुल नया दिखे लेकिन अंदर के पुर्जे उस रफ्तार से काम नहीं कर पाते जैसी उन्होंने शुरुआत में की थी. यह गिरावट हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ समय के साथ होना तय होती है.
इन तमाम दिक्कतों से बचने के बहुत आसान रास्ते भी हैं. समय-समय पर फोन की अनचाही फाइलें डिलीट करते रहें बैकग्राउंड ऐप्स पर लगाम लगाएं और जरूरत पड़ने पर फोन को रीसेट कर लें. अगर आप अपने फोन को थोड़ा और सही से रखेंगे तो वह सालों-साल बिना अटके चलता रहेगा.