Sleep Mode in Laptop: क्या हर बार आप भी Sleep Mode में डाल देते हैं लैपटॉप, जानें इससे परफार्मेंस पर क्या पड़ता है असर?

लैपटॉप यूज करने वाले ज्यादातर लोगों की एक आम आदत होती है, काम खत्म होने के बाद वो लैपटॉप को शटडाउन करने के बजाय सीधा स्लीप मोड में डाल देते हैं. ये आसान तरीका अक्सर हर कोई अपनाता है क्योंकि उन्हें ये आसान भी लगता है और वो काम दोबारा वहीं से कंटिन्यू कर लेते हैं, जहां पर उन्होंने छोड़ा था. क्या आपने सोचा है कि ये आदत लगातार करने से इसका लैपटॉप पर क्या असर पड़ता है, इससे उसकी परफॉर्मेंस और बैटरी पर कितना असर पड़ता है. बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि स्लीप मोड और शटडाउन में जमीन-आसमान का फर्क होता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है, वरना इसका असर धीरे-धीरे करके आपके लैपटॉप की परफॉर्मेंस पर पड़ने लगता है और वह जल्दी पुराना हो जाता है. आइए आपको बताते हैं ऐसा करने से क्या-क्या होता है.
सबसे पहले यह जान लें कि लैपटॉप के अंदर स्लीप मोड क्या होता है. जब आप लैपटॉप को स्लीप मोड पर डाल देते हैं यानी काम करते-करते बीच में बिना शटडाउन किए बिना लैपटॉप को बंद करके छोड़ देना. इस मोड में आपके लैपटॉप का प्रोसेसर और ज्यादातर पार्ट्स बंद हो जाते हैं. लेकिन उसकी RAM लगातार पावर लेती रहती है ताकि आपके खुले हुए डॉक्यूमेंट्स और वर्क स्क्रीन वैसे की वैसे ही रहें जैसे कि आपने बंद किया था. यही वजह है कि स्लीप मोड से लैपटॉप खोलने के बाद आपकी स्क्रीन वैसी ही दिखती है जैसे बंद किया था, आपको दोबारा सारी चीजें नहीं खोलनी पड़तीं.
स्लीप मोड जितना यूजर के लिए आसान साबित होता है उतना ही इसके नुकसान भी हैं. लैपटॉप होता तो स्लीप मोड पर है लेकिन ये बैकग्राउंड में लगातार बैटरी को खर्च करता रहता है, क्योंकि अगर लैपटॉप में RAM काम करती रहती है तब तक उसकी बैटरी जाती रहेगी. यही कारण है कि जब आप रात को अपने लैपटॉप को स्लीप मोड पर छोड़ देते हैं तो सुबह तक आपके लैपटॉप की बैटरी बहुत कम हो जाती है.
स्लीप मोड से बैटरी पर असर तो पड़ता ही है लेकिन इसका उतना ही असर लैपटॉप की परफॉर्मेंस पर पड़ता है. जब आप बार-बार लैपटॉप को बिना शटडाउन किए स्लीप मोड पर छोड़ देते हैं तो RAM की तरह लैपटॉप में बैकग्राउंड में ऐप्स और प्रोसेसेज भी उसी तरह एक्टिव रहते हैं. अगर यही प्रक्रियाएं बार-बार लगातार होती रहें तो इससे प्रोसेसेज RAM पर बोझ डालने लगते हैं, जिसे मेमोरी लीक कहा जाता है. इससे लैपटॉप की स्पीड कम होने लगती है और वह पहले जैसी स्पीड से काम नहीं करता. इसके अलावा, स्लीप मोड में रहते हुए भी सिस्टम कुछ बैकग्राउंड टास्क जैसे अपडेट डाउनलोड करना या नोटिफिकेशन चेक करना करता रहता है, जिससे प्रोसेसर पूरी तरह आराम नहीं कर पाता.
इसके विपरीत अगर लैपटॉप के शटडाउन की बात करें तो इससे सारी मेमोरी क्लियर हो जाती है और लैपटॉप के सभी प्रोसेस बंद हो जाते हैं. ऐसे में जब आप दोबारा लैपटॉप खोलते हैं तो वह दोबारा से रीस्टार्ट होता है एकदम फ्रेश, जो काम करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और अच्छा परफॉर्मेंस देता है, यानी किसी भी कमांड को जल्दी कैच करता है और तेज स्पीड से काम करता है. हालांकि शटडाउन के बाद दोबारा लैपटॉप बूट होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, जबकि स्लीप मोड से वापस आना सेकंडों में हो जाता है.
बैटरी लाइफ की बात करें तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक स्लीप मोड में लैपटॉप हर घंटे करीब 1 से 3 प्रतिशत बैटरी खर्च करता है, जिसका मतलब है कि रातभर स्लीप मोड में रखने पर 8 से 24 प्रतिशत तक चार्ज खत्म हो सकता है. वहीं शटडाउन करने पर लैपटॉप की बैटरी खपत न के बराबर होती है.
इसलिए लैपटॉप को स्लीप मोड में ज्यादा देर तक नहीं रखना चाहिए. ऑफिस के बीच में टी ब्रेक या फिर लंच ब्रेक के लिए चले गए तो उतना चलता है, लेकिन लैपटॉप को पूरी रात स्लीप मोड पर छोड़ना लैपटॉप के लिए सही साबित नहीं होगा. इसलिए रात को अपना काम खत्म कर उसे शटडाउन करके ही छोड़ना चाहिए.