अलर्ट! लोगों को चूना लगाने के लिए ठग कर रहे AI का इस्तेमाल, एक गलती और उड़ सकती हैं आपकी निजी डिटेल्स
आमतौर पर पारंपरिक मैलवेयर पहले से लिखे गए निर्देशों पर काम करते हैं. यानी उन्हें एक तय स्क्रिप्ट के अनुसार डिजाइन किया जाता है. लेकिन PromptSpy इस तरीके से अलग है. यह फोन की स्क्रीन पर मौजूद जानकारी को पढ़ता है और फिर उसी आधार पर AI से पूछता है कि अगला कदम क्या होना चाहिए. यानी यह परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढाल सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार यह मैलवेयर स्क्रीन की जानकारी XML फॉर्मेट में AI सिस्टम को भेजता है. इसमें यूजर इंटरफेस के एलिमेंट, टेक्स्ट, बटन की पोजिशन और अन्य तकनीकी विवरण शामिल होते हैं. इसके बाद AI JSON फॉर्मेट में जवाब देकर बताता है कि किसी ऐप को कैसे लॉक या पिन करना है. फिर यह मैलवेयर एंड्रॉयड की एक्सेसिबिलिटी सर्विस का दुरुपयोग करके उन निर्देशों को लागू कर देता है. अलग-अलग कंपनियों के फोन में ऐप लॉक या पिन फीचर अलग तरीके से काम करता है लेकिन AI की मदद से यह मैलवेयर हर इंटरफेस को समझ सकता है.
PromptSpy केवल ऐप कंट्रोल तक सीमित नहीं है. इसमें एक इनबिल्ट VNC मॉड्यूल भी मौजूद है, जिसकी मदद से हमलावर डिवाइस को दूर बैठकर नियंत्रित कर सकता है. यह स्क्रीन पर चल रही गतिविधियों को देख सकता है, इंस्टॉल किए गए ऐप्स की सूची हासिल कर सकता है, स्क्रीनशॉट ले सकता है स्क्रीन रिकॉर्ड कर सकता है और यहां तक कि लॉकस्क्रीन PIN या पासवर्ड चुराने की कोशिश भी कर सकता है. इस तरह यह साधारण वायरस नहीं बल्कि पूरी तरह जासूसी करने वाला स्पाइवेयर बन जाता है.
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI के इस्तेमाल से ऐसे मैलवेयर पहले से ज्यादा लचीले और खतरनाक हो सकते हैं. हालांकि अभी तक इसके बड़े पैमाने पर फैलने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन भविष्य में यह गंभीर खतरा बन सकता है.
बचाव के लिए जरूरी है कि फोन में केवल भरोसेमंद स्रोत से ही ऐप इंस्टॉल करें अनजान लिंक या फाइल से दूर रहें और डिवाइस में Play Protect जैसे सुरक्षा फीचर को सक्रिय रखें. सबसे अहम बात, अगर फोन में कोई असामान्य गतिविधि दिखे तो तुरंत जांच करें.