5G की रफ्तार बेकार! जानिए दुनिया में कितने अरब लोग आज भी इंटरनेट से हैं पूरी तरह कटे
चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच तो है, लेकिन उसके बावजूद बड़ी आबादी ऑनलाइन नहीं है. विशेषज्ञ इसे “यूसेज गैप” कहते हैं. यानी नेटवर्क मौजूद है पर लोग उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे. इन 3.4 अरब लोगों में से लगभग 30 करोड़ ऐसे हैं जहां नेटवर्क कवरेज ही उपलब्ध नहीं है जबकि करीब 3.1 अरब लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां सिग्नल तो है मगर वे इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल नहीं करते.
इस अंतर के पीछे कई कारण हैं. सबसे प्रमुख वजह खर्च है. कई विकासशील देशों में स्मार्टफोन और डेटा पैक अब भी आम लोगों की पहुंच से महंगे हैं. इसके अलावा डिजिटल साक्षरता की कमी, स्थानीय भाषाओं में पर्याप्त कंटेंट का अभाव और केवल वाई-फाई पर निर्भरता भी बड़ी बाधाएं हैं.
कुछ समृद्ध देशों में स्थिति अलग तस्वीर पेश करती है. उदाहरण के तौर पर Qatar में 5G नेटवर्क का व्यापक विस्तार हो चुका है और वहां मोबाइल इंटरनेट उपयोग दर काफी ऊंची मानी जाती है. इसके विपरीत Jordan, Tunisia, Egypt, Morocco और Algeria जैसे देशों में आने वाले वर्षों में भी इंटरनेट इस्तेमाल सीमित रहने का अनुमान जताया गया है.
मोबाइल इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं है. यह शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन कारोबार और बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच देता है. खासकर महिलाओं और छोटे उद्यमियों के लिए यह आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन सकता है. जब ज्यादा लोग और व्यवसाय ऑनलाइन होते हैं तो नए बाजार खुलते हैं लागत घटती है और उत्पादकता बढ़ती है.
हालांकि 5G का विस्तार जारी है और 6G को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए मजबूत 4G नेटवर्क भी पर्याप्त हो सकता है. असली चुनौती यह है कि बढ़ते डेटा ट्रैफिक और AI तकनीकों के दबाव के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च कौन उठाएगा.
स्पष्ट है कि शेष आबादी को इंटरनेट से जोड़ना सिर्फ तकनीकी सवाल नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी है. जब तक यह यूसेज गैप कम नहीं होता तब तक डिजिटल विकास की पूरी क्षमता हासिल करना मुश्किल रहेगा.