Electric Kettle में Auto Shut-Off कैसे काम करता है? जानें टेक्नोलॉजी

कुछ ही मिनटों में पानी उबालने वाले Electric Kettle में ऐसे सेफ्टी फीचर्स दिए जाते हैं, जो इसे खुद ही बंद कर देते हैं. अब पानी उबलने के बाद आपको स्विच बंद करने के लिए पास खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि kettle को आखिर कैसे पता चलता है कि पानी उबल चुका है. इसके पीछे कौन-सी टेक्नोलॉजी काम करती है. तो आइए जानते हैं कि Electric Kettle में Auto Shut-Off कैसे काम करता है.
Kettle चालू करते ही उसका हीटिंग एलिमेंट बिजली की मदद से गर्म होने लगता है. आम इलेक्ट्रिक केटल में यह हीटिंग एलिमेंट करीब 2000 से 3000 वॉट का हो सकता है. यही हिस्सा पानी का तापमान लगातार बढ़ाता है और उसे उबलने की स्थिति तक पहुंचाता है.
केटल के अंदर तापमान पर नजर रखने के लिए थर्मिस्टर या थर्मोस्टेट जैसे कंपोनेंट इस्तेमाल किए जा सकते हैं. थर्मिस्टर तापमान में बदलाव होने पर अपना इलेक्ट्रिकल रेजिस्टेंस बदलता है. इस बदलाव की जानकारी कंट्रोल सर्किट तक पहुंचती है, जिससे उसे पानी के तापमान का अंदाजा होता है.
जैसे-जैसे पानी उबलने के करीब पहुंचता है, भाप बनने लगती है. कुछ इलेक्ट्रिक केटल में spout के पास भाप को पहचानने वाला मैकेनिज्म लगाया जाता है. भाप सेंसर या स्विच इस बदलाव को पहचानकर ऑटो शट-ऑफ सिस्टम को सक्रिय करने में मदद करता है.
जब सेंसर या थर्मोस्टेट यह संकेत देता है कि पानी तय तापमान या उबलने की स्थिति तक पहुंच गया है, तो कंट्रोल सिस्टम बिजली की सप्लाई काट देता है. इसके बाद हीटिंग एलिमेंट काम करना बंद कर देता है और केटल अपने आप बंद हो जाती है.
ऑटो शट-ऑफ के अलावा कई केटल में बोइल-ड्राई प्रोटेक्शन भी दिया जाता है. अगर केटल में पानी बहुत कम है या बिल्कुल नहीं है, तो यह सिस्टम ज्यादा गर्म होने की स्थिति में बिजली की सप्लाई बंद कर सकता है. इससे हीटिंग एलिमेंट को नुकसान पहुंचने और ओवरहीटिंग का खतरा कम होता है.
ऑटो शट-ऑफ होने के बाद भी केटल का इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है. केटल में जमा लाइमस्केल या गंदगी सेंसर के काम को प्रभावित कर सकती है, इसलिए समय-समय पर इसकी सफाई और डी-स्केलिंग करनी चाहिए. अगर प्लग, केबल या सॉकेट पर जलने के निशान दिखें या अजीब गंध, चिंगारी अथवा असामान्य आवाज आए, तो केटल को तुरंत बिजली से अलग करके उसका इस्तेमाल बंद कर दें.