WhatsApp को सरकार का सख्त आदेश, अब सीधा ब्लॉक होगी डिवाइस ID, ये 5 फीचर्स बचाएंगे आपका पैसा
आजकल डिजिटल अरेस्ट नाम का फ्रॉड तेजी से फैल रहा है जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं. वे झूठा आरोप लगाकर कहते हैं कि आप किसी गंभीर अपराध में फंस गए हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करें. डर और घबराहट में कई लोग उनकी बातों में आ जाते हैं और अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में ऐसे मामलों की संख्या लाखों में पहुंच गई और ठगी की रकम भी हजारों करोड़ तक जा पहुंची. बढ़ते खतरे को देखते हुए एक उच्च स्तरीय कमिटी ने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की. इस बैठक में WhatsApp की तरफ से भी अधिकारियों ने हिस्सा लिया और अपनी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी. सरकार ने साफ कहा कि अब और मजबूत सिस्टम तैयार करने की जरूरत है.
सरकार की तरफ से सुझाए गए उपायों में सबसे अहम है संदिग्ध डिवाइस आईडी को पहचानकर उन्हें तुरंत ब्लॉक करना. इसके अलावा, ऐप में ऐसे फीचर्स जोड़ने पर भी जोर दिया गया है जिससे यूजर्स को कॉल करने वाले की ज्यादा जानकारी मिल सके और संदिग्ध अकाउंट्स पर पहले से चेतावनी दिखाई दे. साथ ही, फर्जी फाइल्स और खतरनाक APK को पहचानकर रोकने के लिए तकनीक को और बेहतर बनाने को कहा गया है.
डेटा सुरक्षा को लेकर भी सख्ती दिखाई गई है. अब हटाए गए अकाउंट्स का डेटा एक तय समय तक सुरक्षित रखना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां उसका इस्तेमाल कर सकें. इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फर्जी पहचान, सरकारी लोगो के दुरुपयोग और नकली कंटेंट को पकड़ने पर भी जोर दिया गया है.
सरकार ने यह भी कहा है कि WhatsApp को एक्टिव सिम कार्ड से जोड़ना जरूरी बनाया जाए ताकि एक ही व्यक्ति कई अनजान अकाउंट्स का इस्तेमाल न कर सके. जांच एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
इन सभी कदमों का मकसद यूजर्स को सुरक्षित रखना और साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना है. हालांकि, सिर्फ तकनीक ही काफी नहीं है. लोगों को भी सतर्क रहना होगा. किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा करने से पहले सोचें और कभी भी डर के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें.