Bluetooth को भूल जाइए! फिर ट्रेंड में आ रहे Wired Earphones, आखिर क्यों दोबारा इनके दीवाने हो रहे हैं लोग?
आज के दौर में हर व्यक्ति कई डिवाइस इस्तेमाल करता है स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्टवॉच और न जाने क्या-क्या. इन सबको चार्ज करने की झंझट पहले ही काफी है. ऐसे में वायरलेस ईयरबड्स की छोटी बैटरी और बार-बार चार्जिंग की जरूरत कई लोगों को परेशान करती है. बैटरी कम होने की चिंता अलग. इसके मुकाबले तार वाले इयरफोन्स में बस प्लग लगाइए और बिना किसी रुकावट के लंबे समय तक संगीत का आनंद लीजिए. न बैटरी प्रतिशत देखने की चिंता न चार्जिंग केस संभालने की झिकझिक.
साउंड क्वालिटी भी एक बड़ा कारण है. ब्लूटूथ कनेक्शन कितना भी आधुनिक क्यों न हो, ऑडियो ट्रांसमिशन के दौरान कुछ न कुछ कंप्रेशन होता ही है. वहीं वायर्ड इयरफोन्स सीधे सिग्नल पहुंचाते हैं जिससे आवाज ज्यादा साफ और डिटेल्ड सुनाई देती है. जो लोग हाई-क्वालिटी म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं वे आज भी तार वाले विकल्प को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं.
ट्रू वायरलेस ईयरबड्स के साथ एक आम समस्या यह भी है कि अगर एक बड खो जाए तो पूरा सेट बेकार हो सकता है. अलग से एक बड खरीदना अक्सर संभव नहीं होता. इसके उलट, वायर्ड इयरफोन्स एक साथ जुड़े रहते हैं इसलिए खोने का खतरा कम होता है और वे लंबे समय तक चलते हैं.
गेमिंग के शौकीनों के लिए भी तार वाले इयरफोन्स बेहतर माने जाते हैं. वायरलेस में कभी-कभी आवाज और एक्शन के बीच हल्की देरी महसूस होती है जो ऑनलाइन गेम्स में फर्क डाल सकती है. वायर्ड कनेक्शन में यह समस्या लगभग नहीं के बराबर होती है जिससे रियल-टाइम रिस्पॉन्स मिलता है.
फैशन की बात करें तो आजकल रेट्रो ट्रेंड फिर से लोकप्रिय हो रहा है. कई युवा और सेलिब्रिटी भी तार वाले इयरफोन्स के साथ नजर आते हैं. यह सिर्फ एक ऑडियो डिवाइस नहीं, बल्कि स्टाइल स्टेटमेंट बनता जा रहा है.
हालांकि यह कहना गलत होगा कि वायरलेस तकनीक खत्म होने वाली है. एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन, वर्कआउट के दौरान आसानी और स्मार्ट फीचर्स जैसी खूबियों के कारण वायरलेस डिवाइस अपनी जगह बनाए हुए हैं. फिर भी वायर्ड इयरफोन्स की वापसी यह साबित करती है कि कई बार सादगी, भरोसा और बेहतर अनुभव ट्रेंड से ज्यादा मायने रखते हैं.