लैपटॉप स्लीप मोड में भी बिजली खाता है? जानिए बैटरी और डिवाइस के लिए कितनी सेफ है ये आदत!
जब आप लैपटॉप को स्लीप मोड में डालते हैं तो उसकी ज्यादातर गतिविधियां रुक जाती हैं. स्क्रीन बंद हो जाती है, प्रोसेसर एक्टिव काम नहीं करता और हार्ड डिस्क या SSD भी निष्क्रिय स्थिति में चली जाती है. हालांकि, सिस्टम की मेमोरी को चालू रखने के लिए थोड़ी-सी बिजली लगातार मिलती रहती है ताकि लैपटॉप दोबारा खोलते ही आपका काम तुरंत सामने आ जाए.
आमतौर पर स्लीप मोड में लैपटॉप सिर्फ 0.5 से 2 वॉट तक बिजली खर्च करता है. तुलना करें तो सामान्य इस्तेमाल के दौरान यही लैपटॉप 20 से 60 वॉट तक पावर ले सकता है जो काम और हार्डवेयर पर निर्भर करता है. पूरी रात स्लीप मोड में रहने पर बिजली की खपत इतनी कम होती है कि बिजली बिल पर इसका असर लगभग नजर ही नहीं आता.
लैपटॉप को पूरी तरह शटडाउन करने पर बिजली की खपत लगभग शून्य हो जाती है लेकिन हर बार सिस्टम को दोबारा चालू होने में समय लगता है. वहीं स्लीप मोड सुविधा देता है ढक्कन खोलते ही काम शुरू. छोटे ब्रेक या रात भर के लिए स्लीप मोड, लैपटॉप को चालू छोड़ने की तुलना में कहीं ज्यादा बेहतर और किफायती विकल्प माना जाता है.
टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नियमित रूप से स्लीप मोड इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित है. आज के आधुनिक लैपटॉप और ऑपरेटिंग सिस्टम इसी तरह डिजाइन किए गए हैं. स्लीप मोड में गर्मी कम बनती है जिससे फैन और प्रोसेसर पर दबाव घटता है और हार्डवेयर की उम्र बढ़ने में मदद मिलती है.
स्लीप मोड में बैटरी बहुत धीरे-धीरे खत्म होती है इसलिए इससे बैटरी को कोई खास नुकसान नहीं होता. हां, अगर लैपटॉप कई दिनों तक बिना चार्ज किए स्लीप मोड में पड़ा रहे, तो बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो सकती है जो लंबे समय में ठीक नहीं माना जाता.
अगर आप लैपटॉप कई दिनों तक इस्तेमाल नहीं करने वाले हैं या फिर कोई बड़ा सिस्टम अपडेट इंस्टॉल करना है तो उसे शटडाउन करना बेहतर रहता है. कभी-कभी रीस्टार्ट करने से सिस्टम की परफॉर्मेंस भी बेहतर बनी रहती है.