IN Pics: कोटा शहर की सड़कों पर साड़ी में निकली हजारों महिलाएं, एक ही जगह दिखी देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति
वन भारत साड़ी वॉकथॉन एक ओर जहां साड़ी के सांस्कृतिक महत्व और समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करता नजर आया वहीं यह आयोजन महिला बुनकरों द्वारा अथक परिश्रम और समर्पण से तैयार की जाने वाली हथकरघा साड़ियों के उपयोग को भी बढ़ावा देगा. केंद्रीय वस्तु एवं रेल राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने वॉकथॉन का शुभारंभ किया और उन्होंने भी साडी पहनकर महिलाओं के साथ कदम से कदम मिलाए.
स्पीकर ओम बिरला भी कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़ें. वॉकथॉन प्रारंभ होने से पूर्व अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉली जैन ने सैकडों तरह से साड़ियों की ड्रेपिंग के तरीके बताऐ। साड़ी वॉकथॉन किशोरपुरा थाने के सामने स्थित दशहरा मैदान के गेट नम्बर 12 से प्रारंभ होकर सीएडी सर्किल, चम्बल गार्डन रोड, ट्राफिक गार्डन के समाने से कोटा आई हॉस्पिटल शक्तिनगर होते हुए नगर निगम कार्यालय के पास स्थित गेट नम्बर 5 से दशहरा मैदान में प्रवेश कर विजय श्री रंगमंच पर समाप्त हुई.
कोटा शहर में वॉकथॉन के दौरान महिलाओं से बात की तो उन्होंने कहा कि साड़ी हमारी संस्कृति है, महिलाओं का मान सम्मान है, युवा भी अब साडी पहन रहे हैं, कोटा में 15 राज्यों की करीब 10 हजार महिलाओं ने अपने-अपने प्रदेश की वेशभूषा को यहां पहना और सड़कों पर निकले, इन्हें जिसने भी देखा देखता ही रह गया.
कोटा में हजारों महिलाएं जुटी, महिलाएं अपने अलग ही अंदाज में वहां आई थी, किसी ने राम राज्य की परिकल्पना को साकार किया तो किसी ने तलवार लेकर नारी शक्ति का परिचय दिया, किसी महिला ने गोटा हाथ में ले रखा था तो किसी ने तिरशूल। महिलाओं का एक से बढ़कर एक निराला अंदाज कोटा में लघु भारत को प्रदर्शित कर गया.
कार्यक्रम के दौरान वॉकथॉन के दौरान केंद्रीय रेल राज्य मंत्री व केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री दशार्ना जरदोश भी महिलाओं के साथ सड़कों पर दिखाई दी और पैदल चलकर महिलाओं का उत्सावर्धन किया. उनके साथ कोटा लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉली जैन सहित कई महिला पदाधिकारी साथ रही.
इस कार्यक्रम में रंग बिरंगी साड़ी पहने महिलाएं कहीं सेल्फी लेती हुई नजर आ रही थी तो कहीं डांस कर रही थी, कहीं तलवारबाजी हो रही थी तो कहीं केसरिया साफे में भी महिलाएं अलग ही अंदाज में दिखाई दे रही थी. देश के मिजोरम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल सहित कई प्रदेशों की संस्कृति साडी के माध्यम से यहां नजर आई.