Haryana Nuh Clash: हेलो! मैं मेवात बोल रहा हूं, आज मुझे नूंह के नाम से जानते हैं..
मैं मेवात बोल रहा हूं..आज मुझे नूंह के नाम से आज जाना जाता है. मुझे भारत का ईरान भी कहा जाता है.
मेरी राजधानी कोटला थी जो मेवात की पहली राजधानी थी, जिसने अपने स्वयं के लोगों द्वारा शासित किया जिन्हें लोकप्रिय तौर पर खानजादा कहा जाता था.
मेरी जमीन पर सूफी हजरत निजामुद्दीन औलिया के मुरीदहजरत शेख मूसा की दरगाह है. इस दरगाह का निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने करवाया था.
परवरिश निजामुदीन औलिया ने की और देशभर में हिन्दू-मुस्लिम एकता और इस्लाम धर्म को बढावा देने के लिऐ उन्हें भ्रमण पर भेज दिया.
उसी दौरान नूंह शहर से करीब तीन किलोमीटर अरावली की वादियों में पल्ला गांव में उनका पल्लू कांटेदार झाडियों से अटक गया.
जिसके बाद ना केवल एतिहासिक हजरत ख्वाजा शेख मूसा की दरगाह वजूद में आई बल्कि उसी दिन से पल्ला गांव बस गया. इस्लाम धर्म का प्रचार करते-करते सन 1332 में उनका देहांत हो गया.