कीचड़ में पैरों के निशान, बिखड़े पड़े जूते, आतंकियों के खूनी खेल को बयां करती बैसरन की तस्वीरें

बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले से जो लोग बचकर लौटे वो उन भयावह तस्वीरों को भुला नहीं पा रहे हैं. चश्मदीदों ने अब तक जो बताया उससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है उन पर क्या गुजरी होगी.
पहलगाम में जिस बैसरन घाटी में आतंकियों ने 22 अप्रैल को हमला किया, वहां के घास के मैदान की तस्वीरें सामने आई हैं.
तस्वीरें उस भयावह मंजर को बयां करने के लिए काफी हैं. आतंकियों के हमले के बाद जान बचाने के लिए भागे लोगों के जूते वहीं रह गए.
कीचड़ में सने जूते इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वहां कैसा माहौल रहा होगा. महिलाओं और पुरुषों के जूते हैं.
चश्मदीदों ने अब तक जो बताया उससे ये पता चलता है कि वो आराम से वहां पर घूम रहे थे और तभी अचानक वहां पर कुछ आतंकी आए और गोलियों की बरसात कर दी.
चश्मदीदों ने ये भी बताया कि आतंकियों ने हिंदू कौन है और मुसलमान कौन है, ये पूछने के बाद गोली मारी.
बैसरन घाटी में घूमने के लिए व्यवस्कों की एंट्री फीस 35 रुपये और 12 साल से कम के बच्चों के लिए 15 रुपये एंट्री फीस है.
बैसरन घाटी को पांच-छह साल पहले पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया. यहां के स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी का साधन यहां से आने वाले पर्यटकों की कमाई पर भी निर्भर करता है.
आतंकियों के हमले ने न सिर्फ लोगों की जान ले ली बल्कि स्थानीय लोगों के व्यापार पर भी चोट किया.