Doomsday Clock: क्या है डूम्स डे क्लॉक जो दुनिया की तबाही का समय बता रहा है ?
आधी रात को 90 सेकंड पर सेट की गई घड़ी यह बताती है कि इंसान के कामों की वजह से हमारा ग्रह विनाश के कितने करीब है.(फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)
बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स (बीएएस) के वैज्ञानिकों ने बीते 3 साल से 100 सेंकेड् पर रुकी ड्म्स डे क्लॉक में 10 सेकेंड का वक्त कम किया है. इस तरह से देखा जाए तो तबाही और आधी रात में अब महज 90 सेकेंड का वक्त ही बचा है. (फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)
परमाणु युद्ध के खतरों के बारे में मानवता को आगाह करने के लिए 1947 में इस घड़ी को बनाने पर विचार किया गया था. किसी खास वक्त पर मानव अस्तित्व के खतरों के वैज्ञानिकों के पढ़ने के आधार पर घड़ी की सुइयां आधी रात के करीब या उससे दूर चली जाती हैं. आधी रात विनाश के सैद्धांतिक बिंदु को बताती है.(फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)
आधी रात को तबाही के वक्त को सेट करने का काम बीएएस विज्ञान और सुरक्षा बोर्ड करते हैं. इसमें 13 नोबेल पुरस्कार विजेता शामिल हैं. यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से इस साल यह ऐलान यूक्रेनी और रूसी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी में भी मुहैया करवाया गया है.(फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)
डूम्सडे क्लॉक बोर्ड ने कहा, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की रूस की धमकियां दुनिया को याद दिलाती हैं कि दुर्घटना, इरादे या गलत आकलन से संघर्ष का बढ़ना एक भयानक जोखिम है. डूम्सडे क्लॉक में आधी रात का वक्त होने में जितना कम वक्त रहता है दुनिया में तबाही का खतरा उतना ही नजदीक होता है. इस साल दुनिया के खत्म होने के कगार पर आने से केवल 90 सेकेंड दूर है. (फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)
बोर्ड के बयान में कहा गया है, युद्ध के असर परमाणु खतरे में बढ़ोतरी तक ही सीमित नहीं हैं, वे जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक कोशिशों को भी कमजोर करते हैं.(फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)
बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के सीईओ राहेल ब्रोंसन ने कहा कि हालांकि इन समस्याओं को इंसानों ने पैदा किया है, बोर्ड का यह भी मानना है कि इंसान वैश्विक जुड़ाव के साथ जोखिमों को कम कर सकते हैं. (फोटो- thebulletin.org/doomsday-clock)