PM Modi Egypt Visit: मिस्र की जिस अल-हाकिम मस्जिद जाएंगे PM मोदी, जानें उसके बारे में सब
अल-हकीम मस्जिद का निर्माण फ़ातिमिद राजवंश के पांचवें ख़लीफ़ा अल-अज़ीज़ ने दसवीं शताब्दी (990 ईस्वी) के आखिर में शुरू करवाया था. इसके बाद में साल 1013 में अल-हकीम ने इसके निर्माण को पूरा किया था.
काहिरा में स्थित इस ऐतिहासिक मस्जिद का नाम छठे फातिमिद और 16वें इस्माइली इमाम खलीफा अल-हकीम बि-अम्र अल्लाह (985-1021) के नाम पर रखा गया है.
फातिमिद राजवंश अरब मूल का एक इस्माइली शिया राजवंश था.
अल-हकीम मस्जिद 13,560 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैली हुई है.
अल-हकीम मस्जिद का जीर्णोद्धार बोहरा समुदाय ने किया गया था और 1980 में यह एक नए रूप में लोगों के सामने आई.
अल-हकीम मस्जिद के निर्माण कार्य की ज़िम्मेदारी दाऊदी बोहरा समुदाय के 52वें धर्मगुरु सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने ली थी.
अल-हकीम मस्जिद की मरम्मत में कुल 27 महीने लगे और मस्जिद को आधिकारिक तौर पर 24 नवंबर 1980 को एक समारोह में फिर से खोला गया.
मोहम्मद बुरहानुद्दीन का संबंध भारत से था और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया था.
अल-हकीम मस्जिद के मरम्मत में सफेद संगमरमर और सोने की सजावट का प्रयोग किया गया.
अल-हकीम मस्जिद को ऐतिहासिक काहिरा के हिस्से के रूप में 1979 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया था.