Mahakumbh 2025: किन-किन हथियारों की ट्रेनिंग लेते हैं नागा साधु, खुद कर दिया खुलासा
यूपी तक से बात करते हुए नागा साधु दिगंबर मनिराज ने कहा, हमने अपना पूरा जीवन भगवान को दे रखा है. हमारे यहां जो ज्ञान में पीएचडी किए होते हैं, उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाती है. इसके बाद आते हैं महंत जो अखाड़ों की व्यवस्था को चलाते हैं. हमारे धर्म को कोई हानि न पहुंचाये इसलिए हमारे यहां नागा साधुओं का एक झुंड बनाया जाता है.
मणिराज पुरी ने महज 13 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था. उन्होंने कहा कि अब सनातन का उद्देश्य और जन्म कल्याण के लिए सब कुछ त्याग कर निकल पड़े हैं. उन्होंने कहा, कड़ाके की ठंड से बचने के लिए नागा साधु अपने शरीर पर शमशान का भभूत मलते हैं.
नागा साधु दिगंबर ने कहा कि हमें योद्धाओं की तरह तैयार किया जाता है. उन्होंने कहा कि अखाड़ों में नागाओं को लाठी चलाना, भाला चलाना, गोली चलाना, कुश्ती करना सिखाया जाता है. उन्होंने कहा कि कल को धर्म पर किसी तरह की हानि न पहुंचे इसे लेकर नागाओं का बनाया गया है.
उन्होंने कहा, हम गुरु के शरणागत हैं. गुरु ने हमें जो बताया है हम उसी रास्ते पर चल रहे हैं. हमारी एक राष्ट्रीय महाकाल सेना भी है. हमारे पास बहुत बड़ा समूह है. हम धर्म को जोड़ने का काम करते हैं. गुरुओं ने हमे मां की तरह पाला तो हमें गृहस्थ जीवन का उतना पता नहीं लगा.
नागा साधु बनने के बाद साधुओं का जीवन पूरी तरह बदल जाता है. दिगंबर मनिराज ने कहा, वे भौतिक सुखों और सभी मोह-माया से ऊपर उठ चुके हैं. उनके लिए अब भगवान शिव ही सब कुछ हैं. हमने अपना परिवार छोड़ा है, लेकिन अब पूरी दुनिया हमारा परिवार है.
महाकुंभ शुरू होने में एक सप्ताह से भी कम समय बचा है, ऐसे में राज्य पुलिस ने मेला क्षेत्र में, खासकर संगम के आसपास सघन जांच अभियान शुरू किया है. सरकार का अनुमान है कि 13 जनवरी से 26 फरवरी तक धार्मिक समागम के दौरान विदेशियों सहित करीब 40 से 45 करोड़ पर्यटक आएंगे.