PHOTOS: बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार दशहरा देश भर में उल्लास के साथ मनाया गया
Ramlila Celebrations: लंका नरेश रावण, उसके बेटे मेघनाद और भाई कुंभकरण का पुतला दहन किये जाने के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार दशहरा शुक्रवार को देशभर में उल्लास के साथ मनाया गया, जबकि पिछले साल कोविड-19 के मामले बढ़ने की वजह से समारोह फीका रहा था. नदियों और जलाशयों में प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही दुर्गा पूजा उत्सव शुक्रवार को संपन्न हो गया.
हालांकि, छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन करने जा रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा 17 अन्य घायल हो गए. वहीं, राजस्थान के धौलपुर में पांच लोग देवी दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान पार्वती नदी में डूब गये.
सुरक्षा अधिकारियों की कड़ी निगरानी के बीच यह पर्व कोविड-19 नियमों के अनुपालन के साथ मनाया गया. वहीं, कई स्थानों पर रावण का पुतला बगैर पटाखों के दहन किया गया और सोशल मीडिया मंचों पर इसका सीधा प्रसारण किया गया. हालांकि, उत्तर प्रदेश में मथुरा के एक मंदिर में रावण की पूजा की गई.
लंकेश मित्र मंडल द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन यमुना नदी के तट पर स्थित मंदिर में किया गया. मंडल के राष्ट्रीय प्रमुख ओमवीर सारस्वत ने कहा कि फसल अवशेष (पराली) जलाने के खिलाफ चलाये गये अभियान की तरह ही सरकार को रावण का पुतला दहन करने के खिलाफ भी एक अभियान शुरू करना चाहिए क्योंकि यह भी पर्यावरण प्रदूषण करता है. दिल्ली में दशहरा का उत्सव दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के मुताबिक कोविड-19 नियमों का अनुपालन करते हुए रावण का पुतला दहन कर मनाया गया और प्रतिमाओं का विसर्जन जलाशयों में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लाल किले के ऐतिहासिक लव कुश रामलीला में दशहरा उत्सव में शामिल हुए. डीडीएमए ने उत्सव के दौरान मेले और खाने-पीने की दुकानें लगाने की अनुमति नहीं दी थी. दिल्ली में त्योहारी कार्यक्रम खड़े होकर देखने की भी अनुमति नहीं थी. सामाजिक दूरी के नियमों का अनुपालन करते हुए सिर्फ कुर्सियों पर बैठकर ही इसमें शामिल होने की अनुमति थी.
ओडिशा के गंजाम जिले के ब्रहमपुर शहर में राज्य के कुछ तेलुगू समुदाय के लोगों ने लुप्त होती ‘बोम्माला कोलुवु’ परम्परा का पालन किया, जबकि राज्य के अधिकतर हिस्सों में कोविड-19 संबंधी पाबंदियों के कारण जश्न को सीमित ही रखा गया. ‘बोम्माला कोलुवु’, भारत में शरद ऋतु में मनाया जाने वाला गुड़ियों तथा मूर्तियों का उत्सव है. इसे नवरात्रि के पहले दिन से दशहरे तक मनाया जाता है. हाथियों के भव्य ‘जंबू सवारी’ जुलूस के साथ कर्नाटक के मैसुरू में दस दिवसीय दशहरा उत्सव का समापन हो गया.
इसे नवरात्रि के पहले दिन से दशहरे तक मनाया जाता है. हाथियों के भव्य ‘जंबू सवारी’ जुलूस के साथ कर्नाटक के मैसुरू में दस दिवसीय दशहरा उत्सव का समापन हो गया. हालांकि, मैसुरू राजमहल अगले नौ दिनों तक जगमगाता नजर आयेगा. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने पर्यटकों की खातिर ऐसी व्यवस्था करने का आदेश दिया. कोविड-19 के साये में कई पाबंदियां लगी थीं, जिस कारण आम लोग नहीं जुट पाये क्योंकि प्रशासन ने आगंतुकों पर रोक लगा दी थी और सीमित पास जारी किये थे.
पश्चिम बंगाल में विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पंडाल से प्रतिमा विसर्जन के लिए रंगबिरंगी जुलूस के शक्ल में निकली और इस दौरान पुलिस किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मुस्तैद दिखी. दिन में महिलाएं पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ में शामिल होती नजर आई और उन्होंने एक दूसरे को सिंदूर लगाया और मां दुर्गा की विदाई करने से पहले उन्हें मिठाई का भोग लगाया.