Water fasting Trend: डिटॉक्स के नाम पर वॉटर फास्टिंग खतरनाक, एक्सपर्ट बोले- DIY करना हो सकता है नुकसानदायक

Water fasting Trend: आजकल वजन घटाने और शरीर को डिटॉक्स करने के नाम पर वाॅटर फास्टिंग तेजी से ट्रेंड में है. सोशल मीडिया पर इसे हेल्थ हैक की तरह बताया जा रहा है, जहां लोग 24 से 72 घंटे तक सिर्फ पानी पीकर वजन कम करने की कोशिश करते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना डॉक्टर की निगरानी के इस तरह का प्रयोग शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. दरअसल कई डॉक्टरों ने इस ट्रेंड को लेकर चेतावनी दी है, उनका कहना है कि ज्यादातर लोगों के लिए खुद से किया गया वाॅटर फास्टिंग एक गलत डिसीजन हो सकता है. इससे शुरुआत में थोड़ा वजन कम होता है और ब्लड प्रेशर में हल्का सुधार दिख सकता है. लेकिन लंबे समय में इसका खास फायदा नहीं होता है.
डॉक्टरों के अनुसार मेडिकल साइंस में फास्टिंग का इस्तेमाल होता है, लेकिन यह हमेशा डॉक्टर की निगरानी में किया जाता है. सोशल मीडिया या यूट्यूब देखकर खुद से फास्टिंग करना खतरनाक हो सकता है .
वहीं जिन लोगों को टाइप-1 डायबिटीज है, जो पहले से कमजोर या कुपोषित हैं, जिनका हाल ही में वजन तेजी से कम हुआ या जो नियमित दवाई लेते हैं. उनके लिए वाॅटर फास्टिंग खतरनाक हो सकती है. ऐसे मामलों में यह एक्सपेरिमेंट नहीं बल्कि बड़ा रिस्क बन सकता है.
इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति सिर्फ वजन कम करने या ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए वाटर फास्टिंग करना चाहता है तो भी बिना जांच के इसे करना ठीक नहीं है. डॉक्टर के अनुसार फास्टिंग शुरू करने से पहले जांच, बीच में मॉनिटरिंग और सबसे जरूरी रि-फीडिंग प्लान होना चाहिए. क्योंकि फास्टिंग के बाद नार्मल खाना शुरू करना भी एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है.
वहीं अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी रिपोर्ट नॉर्मल है, तब भी खुद से वाॅटर फास्टिंग शुरू करना सही नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, इसलिए इसके पीछे स्पष्ट कारण और सुरक्षित योजना होना जरूरी है.
दरअसल एक्सपर्ट्स के अनुसार वाॅटर फास्टिंग के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. जैसे पहले 1 से 3 दिन में शरीर का ग्लाइकोजन कम होता है और पानी का वजन घटता है. इसके बाद शरीर कीटोसिस में जाता है और धीरे-धीरे मांसपेशियां टूटने लगती है. वहीं इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बिगड़ने लगता है. ऐसे में शुरुआत में वजन कम होता दिखता है, लेकिन इसमें पेट के साथ मसल लॉस भी शामिल होता है. इसके अलावा इन्सुलिन सेंसटिविटी में जो सुधार दिखता है वह बाद में वापस हो सकता है.
वाटर फास्टिंग के दौरान कई तरह की समस्याएं जैसे थकान, सिर दर्द और चक्कर, डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन, और यूरिक एसिड बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है.
सबसे गंभीर स्थिति री-फीडिंग सिंड्रोम हो सकते हैं, जिसमें लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक खाना शुरू करने पर शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ जाता है. इससे दिल की धड़कन, दिमाग और दूसरे अंगों पर असर पड़ सकता है.
ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि वाॅटर फास्टिंग की जगह संतुलित और सुरक्षित तरीके अपनाने चाहिए. इन तरीकों में संतुलित डाइट जैसे मेडिटरेनियन या सात्विक भोजन, कैलोरी कंट्रोल, समय के अनुसार खाना, पर्याप्त प्रोटीन लेना और नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल है.