रामायण और महाभारत काल के साक्षी भारत के ये प्राचीन मंदिर, जो जोड़ते हैं दो युगों को!
भारत के वो मंदिर जिनका संबंध रामायण और महाभारत काल दोनों से हैं. ये मंदिर दो महान युगों को जोड़ने का काम करते हैं, और दर्शाते हैं कि, कैसे भगवान राम और पांडवों ने एक ही पवित्र स्थान पर उपासना की थी. इनमें रामेश्वरम से लेकर सोमनाथ तक के मंदिर शामिल है. जानते हैं इसके बारे में.
हिंदू धर्म में रामेश्वरम मंदिर अत्यंत पवित्र मंदिरों में शामिल है. भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां पर भगवान महादेव की पूजा-उपासना की थी. सालों बाद, कुरुक्षेत्र यु्द्ध के बाद पांडवों ने शुद्धि प्राप्त करने के लिए इसी स्थान का दौरा किया था. यह मंदिर समर्पण का प्रतीक माना जाता है. किसी भी बड़े कार्य से पूर्व और किसी भी बड़े नुकसान के बाद प्रत्येक आत्मा दिव्य शांति की तलाश में रहती है.
मान्यताओं के मुताबिक भगवान कृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध द्वारका में भगवान राम के दिव्य मार्ग के भी अंश देखने को मिलते हैं. यह घर की अवधारणा जन्म-मृत्यु से परे मानी जाती है. द्वारका को बेहद पवित्र स्थान माना जाता है, जहां भक्ति और दिव्य विरासत का प्रतीक है.
हिमालय की गोद में बसा बद्रीनाथ चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक है. मान्यताओं के मुताबिक भगवान राम यहां आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए आए थे, जबकि पांडवों ने इसी जगह से अपनी स्वर्ग की यात्रा की शुरुआत की थी. यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि, हर अंत एक शुरुआत का प्रतीक है.
त्र्यंबकेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जो गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है. शास्त्रों के अनुसार, भगवान राम और पांडवों के इस पवित्र स्थान पर आने का उल्लेख हमेशा से मिलता है. नदी का उद्गम स्थल जो इस बात का प्रतीक है कि, हमारे कर्मों का फल हमें अवश्य मिलता है.
भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर कई आक्रमणों और पुनर्निर्माणों का साक्षी है. मान्यातओं के मुताबिक, राम और पांडवों ने शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां पर उपासना की थी. सदियों से चली आ रही विनाश के बावजूद मंदिर आज भी ऐसे ही खड़ा है.