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दतिया की पहचान बदल देने वाले 5 प्राचीन मंदिर, जिनके दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

हर्षिका मिश्रा   |  12 Jul 2026 06:51 AM (IST)
दतिया की पहचान बदल देने वाले 5 प्राचीन मंदिर, जिनके दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

दतिया के मंदिर

1

मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर दतिया सिर्फ अपने किलों के लिए ही नहीं, बल्कि असीम आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी विख्यात है. बुंदेलखंड के इस पावन हिस्से को श्रद्धा से 'लघु वृंदावन' कहा जाता है. सरकारी पर्यटन आंकड़ों और स्थानीय इतिहास के अनुसार, यहाँ के प्राचीन मंदिरों में मांगी गई मन्नतें कभी खाली नहीं जाती हैं.

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2

श्री पीताम्बरा पीठ (Shree Peetambara Peeth): दतिया के प्रवेश द्वार पर स्थित पीताम्बरा पीठ देश के सबसे प्रसिद्ध और जाग्रत शक्तिपीठों में से एक है. इसकी स्थापना 1935 में श्रद्धेय स्वामीजी महाराज (गोलोकवासी) द्वारा की गई थी. बगलामुखी देवी और धूमावती माई की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमाएं हैं. पूरे भारत में धूमावती माता का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ उनकी नियमित पूजा होती है. राजनेताओं, अभिनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस मंदिर की गहरी मान्यता है. ऐसा माना जाता है कि यहाँ की गई विशेष पूजा से सत्ता और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.

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3

सोनागिर जैन मंदिर (Sonagiri Jain Temples): दतिया से 15 किलोमीटर दूर स्थित सोनागिर, दिगंबर जैन समुदाय का एक परम पवित्र और ऐतिहासिक सिद्ध क्षेत्र है. यह स्थान अपनी वास्तुकला और शांति के लिए दुनिया भर में मशहूर है. विशाल श्रृंखला: एक ऊँची पहाड़ी पर सफेद संगमरमर से बने 100 से अधिक सुंदर मंदिर फैले हुए हैं. यहाँ का मुख्य मंदिर भगवान चंद्रप्रभु को समर्पित है. ऐतिहासिक महत्व: माना जाता है कि इस पवित्र पहाड़ी से राजा नंग अनंग कुमार सहित करोड़ों संतों ने मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया था.

4

रतनगढ़ माता मंदिर (Ratangarh Mata Mandir) सिंध नदी के तट पर घने जंगलों के बीच बसा रतनगढ़ माता मंदिर आस्था का एक और बड़ा केंद्र है. यह दतिया से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. भाई दूज का ऐतिहासिक मेला: हर साल दीपावली के अगले दिन (भाई दूज) यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता और कुंवर महाराज के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता: स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि कुंवर महाराज के नाम का धागा बांधने से जहरीले जीवों (जैसे सांप) के काटने का असर खत्म हो जाता है.

5

वनखंडेश्वर महादेव मंदिर (Vankhandeshwar Temple): पीताम्बरा पीठ परिसर के भीतर ही स्थित यह मंदिर शिव भक्तों के लिए बहुत खास है. पुरातत्वविदों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह एक महाभारत-कालीन मंदिर है. ऐसा माना जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं महाभारत काल में अश्वत्थामा ने की थी. यहाँ का वातावरण बेहद शांत और ध्यान लगाने के लिए उत्तम माना जाता है. सावन और महाशिवरात्रि पर यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं.

6

उनाव बालाजी सूर्य मंदिर (Unao Balaji Sun Temple): दतिया शहर से करीब 17 किलोमीटर दूर उनाव में स्थित यह सूर्य मंदिर प्रागैतिहासिक (Pre-Historic) काल का माना जाता है. भारत में गिने-चुने सूर्य मंदिरों में इसकी बड़ी प्रतिष्ठा है. चमत्कारी कुंड: मंदिर के पास एक पवित्र जल कुंड (तालाब) है. स्थानीय और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस कुंड में स्नान करने से असाध्य त्वचा रोग दूर हो जाते हैं. दर्शन का समय: हर रविवार को यहाँ भक्तों का भारी हुजूम उमड़ता है.

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