✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

Rahu And Ketu: सूर्य-चंद्र को निगलने वाले छायाग्रहों की आध्यात्मिक कथा

हर्षिका मिश्रा   |  24 Jul 2026 03:48 PM (IST)
Rahu And Ketu: सूर्य-चंद्र को निगलने वाले छायाग्रहों की आध्यात्मिक कथा

राहु केतु पौराणिक कथा

1

बहुत पुरानी बात है, जब देवता और असुर मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे. उद्देश्य था, अमृत की प्राप्ति, जो अमरत्व का वरदान था. लंबे प्रयास के बाद जब अमृत निकला, तो देवताओं ने उसे सुरक्षित रखने की योजना बनाई. परंतु असुरों की दृष्टि उस पर टिकी थी, वे भी उस अमृत का हिस्सा चाहते थे.

Continues below advertisement
2

उसी समय स्वर्भानु नामक एक असुर ने छल से देवता का वेश धारण किया. वह देवताओं के बीच बैठकर अमृत पीने लगा. सूर्य और चंद्र देवों ने उसकी कपट भरी चाल को पहचान लिया और तुरंत भगवान विष्णु को सूचित किया, जो मोहिनी रूप में वहां उपस्थित थे.

Continues below advertisement
3

विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया. लेकिन तब तक अमृत उसके कंठ तक पहुँच चुका था, जिससे वह मृत्यु से बच गया. उसका सिर और शरीर अलग तो हो गए, पर दोनों में जीवन की चेतना बनी रही, जिससे दो शक्तिशाली रूपों का जन्म हुआ — राहु और केतु.

4

सिर वाला भाग राहु कहलाया और धड़ वाला भाग केतु. इन्हें ‘छायाग्रह’ कहा गया, क्योंकि ये पूर्ण ग्रह नहीं थे, परंतु उनका प्रभाव अत्यंत गहरा था. कहा जाता है कि इनका जन्म स्थल उज्जैन माना जाता है, जहां इन्हें उत्पन्न हुआ बताया गया है.

5

राहु और केतु सूर्य और चंद्र पर ग्रहण डालने वाले माने गए. राहु को सांसारिक आकर्षण, मोह और भौतिक इच्छाओं का प्रतीक कहा गया, जबकि केतु त्याग, अनुभव और आध्यात्मिकता का प्रतीक बना. ये दोनों ही ब्रह्मांड में संतुलन के प्रतीक हैं — एक बंधन लाता है, दूसरा मुक्ति देता है.

6

इस कथा से यह संदेश मिलता है कि जीवन में राहु और केतु दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है. एक हमें अनुभवों के माध्यम से सिखाता है, दूसरा हमें उनसे ऊपर उठने की राह दिखाता है. बाहरी संसार और आंतरिक आत्मा के बीच संतुलन ही सच्चे जीवन का सार है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • धर्म
  • Rahu And Ketu: सूर्य-चंद्र को निगलने वाले छायाग्रहों की आध्यात्मिक कथा
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.