✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

Mahabharat: महाभारत की सीख से जानिए धर्म, साहस और सही सहयोग का महत्व

अणिमा शुक्ला   |  30 Jun 2026 10:30 AM (IST)
Mahabharat: महाभारत की सीख से जानिए धर्म, साहस और सही सहयोग का महत्व

महाभारत कथा

1

महाभारत के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर का शासन न्याय, धर्म और लोककल्याण का प्रतीक था. उनकी प्रजा सुखी, समृद्ध और संतुष्ट थी. वे अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करते थे और सभी के साथ समान व्यवहार करते थे. इसी कारण उनका राज्य चारों दिशाओं में आदर्श शासन के रूप में प्रसिद्ध था.

2

एक दिन श्रीकृष्ण और अर्जुन ने मनोरंजन तथा विश्राम के उद्देश्य से वन में विहार करने का निश्चय किया. दोनों सुंदर वन, वृक्षों, पुष्पों और पक्षियों की मधुर ध्वनियों का आनंद लेते हुए आगे बढ़े. प्रकृति की शांति और सौंदर्य के बीच उनका यह भ्रमण एक महत्वपूर्ण घटना की शुरुआत बनने वाला था.

3

वन में भ्रमण के दौरान श्रीकृष्ण और अर्जुन के सामने एक तेजस्वी ब्राह्मण आया. उसका तेज सामान्य मनुष्य से कहीं अधिक था. उसने दोनों वीरों का सम्मानपूर्वक अभिवादन किया और सहायता की प्रार्थना की. उसकी वाणी और व्यक्तित्व देखकर दोनों समझ गए कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं है.

4

ब्राह्मण ने अपना वास्तविक परिचय देते हुए बताया कि वह स्वयं अग्निदेव हैं. उन्होंने कहा कि वे खांडव वन को जलाना चाहते हैं, लेकिन इंद्र बार-बार वर्षा करके उनकी इच्छा पूरी नहीं होने देते. इसलिए उन्होंने श्रीकृष्ण और अर्जुन से इस कार्य में सहयोग और सुरक्षा देने का अनुरोध किया.

5

अग्निदेव ने अर्जुन से कहा कि यदि वे अपने दिव्य धनुष, बाण और श्रीकृष्ण के साथ उनकी रक्षा करें, तो वे खांडव वन को सफलतापूर्वक भस्म कर सकेंगे. अर्जुन ने अपनी शर्तें बताईं और दिव्य अस्त्र-शस्त्र की आवश्यकता व्यक्त की. इसके बाद इस ऐतिहासिक प्रसंग की भूमिका तैयार हुई.

6

इस प्रसंग से सीख मिलती है कि जब उद्देश्य धर्म और लोकहित का हो, तब साहस, निष्ठा और सही सहयोग से कठिन से कठिन कार्य भी पूरे किए जा सकते हैं. श्रीकृष्ण और अर्जुन ने पहले सत्य जाना, फिर धर्म के अनुसार निर्णय लिया. यही विवेक, कर्तव्य और सहयोग जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • धर्म
  • Mahabharat: महाभारत की सीख से जानिए धर्म, साहस और सही सहयोग का महत्व
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.