Leh Ladakh: लेह के लोग कौन सा धर्म मानते हैं? जानिए इसके पीछे का रहस्य!
लद्दाख दो जिलों में विभाजित है, जिसमें पहला लेह और दूसरा कारगिल है. लद्दाख की राजधानी भी लेह है, जहां बीते दिन बुधावर को छात्रों और युवाओं का हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला. इन सबके अलावा क्या आपने कभी सोचा है कि, लेह के लोग किस धर्म को मानते हैं?
लेह, लद्दाख में हाल ही में एक बड़ा आंदोलन हुआ है, जिसमें चार लोगों की मौत और दर्जनों लोग घायल हुए हैं. यह आंदोलन मुख्य रूप से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकारों को शामिल करने को लेकर किया गया था.
लद्दाख में प्रमुख रूप से दो धर्मों का प्रभुत्व है. जिसमें पहला बौद्ध धर्म तो दूसरा इस्लाम धर्म हैं. लद्दाख के करगिल जिले में मुख्यत शिया मुसलमान की अबादी सबसे ज्यादा है.
बात करें लेह की तो यहां रहने वाले लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं. इंटरनेट पर मिली जानकारी के अनुसार लेह की कुल आबादी का करीब 60 प्रतिशत बौद्ध धर्म को मानता है. इसके अलावा लेह में ईसाई, सिख, हिंदू समेत अन्य धर्मों के भी लोग रहते हैं.
लद्दाख में सबसे पहले आर्य आए थे, और वो प्रकृति को दैवीय शक्ति मानकर उनकी पूजा करते थे. लेह लद्दाख में बौद्ध धर्म दो चरणों में आए, दूसरी शताब्दी ईस्वी में कश्मीर और कुषाण साम्राज्य के जरिए और फिर सातवीं शताब्दी के बाद बौद्ध धर्म यहां की जड़ों में पूरी तरह से बस गया.
यहां के लोग मूर्ति पूजा में विश्वास करते हैं और यहां के ज्यादातर बौद्ध मठों में बुद्ध की कई बड़ी और छोटी मूर्तियां हैं. इनमें सबसे प्रसिद्ध थिकसे मठ में मैत्रेय बुद्ध की विशाल मूर्ति और शे मठ में सोने से मढ़ी शाक्यमुनि बुद्ध की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र हैं.
लेह में जानलेवा हिंसा भड़काने को लेकर सोनम वांगचुक और कुछ कांग्रेसी नेताओं का नाम निकलकर आ रहा है.