Hindu Temple: भगवान श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने की थी कोर्णाक मंदिर की स्थापना, जानें मंदिर से जुड़े रहस्यमय तथ्य
मान्यता है कि सूर्य देव की अराधना करने से सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और व्यक्ति रोग मुक्त हो जाता है. पौष माह में सूर्य देव की अराधना का विशेष महत्व है. इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं ओडिशा में स्थित कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में, जो कि सूर्य देवता को समर्पित है. ये देश के सबसे बड़े 10 मंदिरों में गिना जाता है.
कोणार्क मंदिर ओडिशा राज्य के पुरी शहर से लगभग 23 मील दूर चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित है. इस मंदिर की रचना इस प्रकार की गई है कि जैसे एक रथ में 12 पहिए लगाए गए हैं. ये मंदिर पूरी करह से सूर्य देव को समर्पित है. रथ को 7 बड़े ताकतवर घोड़े खींच रहे हैं. और सूर्य देव रथ में विराजमान है.
मंदिर के शिखर से उगते और ढलते सूर्य दोनों को साफ देखा जा सकता है. वहीं, मंदिर के आधार को सुंदरता प्रदान करते 12 चक्र बारह महीनों को दर्शाते हैं. बता दें कि यहां स्थानिय लोग सूर्य को बिरंचि-नारायण भी कहते हैं. यह अपने वास्तु के लिए दुनियाभर में मशहूर है.
मंदिर को लेकर एक रहस्य भी है, जिसके बारे में कई इतिहासकारों ने जानकारी इक्ट्ठी की है. कहते हैं श्री कृष्ण के पुत्र साम्बा को कोढ़ हो गया था. रोग से मुक्त होने के लिए साम्बा ने चंद्रभागा नदी के तट पर 12 साल सूर्य देव की कठिन तपस्या की और सूर्य देव को प्रसन्न किया.
साम्बा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उनका कोढ़ दूर कर दिया. जिसके बाद साम्बा ने सूर्य देव का एक मंदिर निर्माण का निश्चय किया. रोग नाश के उपरांत साम्बा को चंद्रभागा नदी में स्नान करते हुए सूर्य देव की मूर्ति मिली.
साम्बा ने इस मूर्ति को मित्रवन में एक मंदिर में स्थापित कर दिया. तभी से ये स्थान पवित्र माना जाने लगा. ये मंदिर दो भागों में बंटा हुआ है. जिसमें पहले भाग नट मंदिर में सूर्य की किरणे पहुंचती हैं. वहीं, मंदिर में एक कलाकृति में इंसान हाथी और शेर से दबा है जो कि पैसे और घमंड का घोतक है.