Chhath Puja 2025: छठ पूजा में पहले डूबते फिर उदयीमान सूर्य को क्यों दिया जाता है अर्घ्य, जान लें इसके कारण
छठ पूजा के तीसरे दिन यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसका बाद चौथे दिन सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन हो जाता है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहों का राजा होता है. सूर्य को भाग्य, सफलता और निरोगी काया से जोड़कर देखा जाता है. सूर्य को अर्घ्य देकर निरोगी काया और सुख समृद्धि की कामना की जाती है.
छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का मुख्य कारण यह है कि सूर्य का ढलना जीवन के उस समय का प्रतीक है, जब व्यक्ति को मेहनत और तपस्या का फल मिलने लगता है. डूबते सूर्य को जल अर्पित करने से जीवन में संतुलन, शक्ति और ऊर्जा बनी रहती है.
यह इस बात का भी प्रतीक होता है कि हर अस्त के बाद एक नया सूर्योदय होता है, उसी तरह जीवन में हर समस्या के बाद एक नई उम्मीद और नया सवेरा आता है. इसलिए छठ पूजा में पहले डूबते सूर्य को फिर उगते सूर्य को अर्ध्य देने की परंपरा रही है.
धार्मिक रूप से माना जाता है कि कि डूबते समय सूर्य देव अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ में होते है. इस समय अर्घ्य देने से जीवन में चल रही हर समस्या दूर हो जाती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है.
शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य के तीन रूप हैं सुबह में ब्रह्म, दोपहर में विष्णु और शाम में शिव. मान्यता है कि संध्या के समय सूर्य की पूजा करने से अकाल मृत्यु से भी सुरक्षा मिलती है.