Chanakya Niti: जिस व्यक्ति में होती है ये एक आदत, उसके बिगड़े काम भी बन जाते हैं
बन्धाय विषयासक्तं मुक्त्यै निर्विषयं मनः। मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः ॥ - चाणक्य ने मन को सुख और दुख का कारण माना है. वह कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने मन और इच्छाओं पर नियंत्रण कर ले तो उसके जीवन में सुख ही सुख है.
चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति का मन बहुत चंचल होता है. मन के वश में रहने वाला मानव जीवन और मौत के चक्र से कभी मुक्त नहीं हो सकता. वहीं जिसने मन पर काबू पा लिया उसके बिगड़े काम भी बन जाते हैं, क्योंकि वह सोच-समझकर और समझदारी से कार्य को पूर्ण करता है.
जिसका मन अशांत होता है वो तमाम सुविधाएं होने के बाद भी कभी खुश नहीं रह पाता. चाणक्य कहते हैं कि न सिर्फ सफलता बल्कि एकाग्र मन से ही प्रभू की प्राप्ति भी होती है.
मन शांत होगा और नियंत्रण में होगा तो व्यक्ति बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाल लेगा, फिर चाहे हार ही क्यों न नजर आ रही हो.
चाणक्य कहते हैं कि सुख और दुख दोनों ही परिस्थिति में व्यक्ति को अपनी भावनाओं और मन पर कंट्रोल रखना चाहिए. यही एक समझदार इंसान की निशानी है, क्योंकि इन दोनों ही मुंह से निकला शब्द आपके लिए घातक हो सकता है.
चाणक्य के अनुसार यदि मनुष्य ने अपने मन को साधना सीख लिया तो उससे बड़ा तपस्वी कोई नहीं है. ऐसे व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ से मुक्त हो जाते हैं.