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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर: रहस्य, इतिहास और गणपति के शक्तिशाली रूप!

अंकुर अग्निहोत्री   |  04 Jul 2025 06:30 PM (IST)
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मोरगांव स्थित मयूरेश्वर अष्टविनायक में प्रथम गणपति गणेश विराजमान हैं. इस जगह गणपति की स्वयंभू उत्पत्ति है. पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी ने इसी जगह मोर पर बैठकर सिंधु नामक राक्षस को मारा था. इसी कारण उनका नाम मयूरेश्वर पड़ा. मंदिर में स्थित गजानन की बैठी हुई मूर्ति देखने में काफी आकर्षक लगती है. मंदिर में विराजमान गणपति की तीन आंखें हैं और आंखों और नाभि पर हीरा जड़ा हुआ है. सूंड बाई तरफ मुड़ी हुई है और सिर पर नागराज की माला है. मंदिर के चार दरवाजे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग का प्रतीक माने जाते हैं.और कलियुग के प्रतीक माने जाते हैं...

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अहमदनगर जिले के सिद्धटेक में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर अष्टविनायक में दूसरे गणपति महराज हैं. इस गणपति जी के रूप में पौराणिक कहानी है कि भगवान विष्णु का मधु और कैथा नामक राक्षस से युद्ध चल रहा था. कई सालों तक चले युद्ध में विष्णु जी को सफलता नहीं मिली. तब भगवान शिव ने श्री विष्णु को गणपति का स्मरण करने को कहा. उसके बाद मधु और कैथा नाम के राक्षस का वध हो गया. इसी वजह से इस मंदिर में श्री विष्णु भी विराजमान हैं. सिद्धिविनायक की मूर्ति 3 फीट ऊंची और 2.5 फीट चौड़ी है. गणपति यहां दाहिनी सूंड में विराजमान हैं.

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पाली रायगढ़ जिले में स्थित श्री बल्लालेश्वर बेहद ही सुंदर मंदिर है. इस मंदिर का नाम गणेश जी के प्रिय भक्त बल्लाल के नाम से मंदिर का नाम बल्लालेश्वर रखा गया था. पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी के भक्त बल्लाल को गणेश जी की मूर्ति के साथ जंगल में फेंक दिया गया था. तब गणपति गणेश बल्लाल की भक्ति से खुश होकर उन्होंने बल्लाल को दर्शन दिए. इसके साथ ही गणेश जी ने अपने भक्त को ये भी कहा कि आने वाले कई सालों तक वे इसी स्थान पर रहेंगे.

4

रायगढ़ जिले में स्थित श्री वरदविनायक अष्टविनायक के चौथे गणपति हैं. श्री वरदविनायक गणपति को नवसा प्राप्त करने वाला कहा जाता है. मंदिर में अंदर आने के बाद ऋद्धि-सिद्धि की मूर्ति भी विराजमान हैं. उसके बाद आपको गणपति के दर्शन होंगे. मंदिर के चारों ओर हाथी हैं.

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महाराष्ट्र के पुणे जिले के ओजर गांव में श्री विघ्नेश्वर मंदिर स्थित है. विघ्नेश्वर अष्टविनायक के सातवें गणेश हैं. ऐसे में श्री विघ्नेश्वर के इस गणेश मंदिर में स्वर्ण शिखर और शिखर है. पुराणों के अनुसार इस जगह गणेश जी ने विघ्नासुर नामक राक्षस का वध किया था. तभी से इस गणेश जी का नाम विघ्नेश्वर पड़ा.

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पुणे जिले में स्थित लेण्याद्री गांव में श्री गिरिजात्मज गणेश जी का मंदिर है. गणेश जी का ये एकमात्र ऐसा मंदिर है, जो पहाड़ पर स्थित है. इसके साथ ही इस मंदिर का निर्माण एक बौद्ध गुफा के स्थान पर बना हुआ है. गिरिजा देवी माता पार्वती का नाम है, और इस पर्वत पर उनके पुत्र गिरिजात्मज गणेश जी के नाम से पूजे जाते हैं. मंदिर में तकरीबन 300 सीढ़ियां हैं. इस पहाड़ के ऊपर करीब 18 बौद्ध गुफाएं हैं. उन्हीं में से आठवीं गुफा में गिरिजात्मज मंदिर भी है.

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महाराष्ट्र के पुणे जिले के रांजनगांव में श्री महागणपति का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है. यह गणेश जी का सबसे ताकतवर और शक्तिशाली रूप है. इस मंदिर में गणेश जी कमल पर विराजमान है और उनके साथ ऋद्धि और सिद्धि भी हैं. गजानन के इस रूप को महोत्कट भी कहते हैं. गणेश जी की इस मूर्ति में 10 सूंड और 20 हाथ हैं. मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. लाखों भक्त हर साल अष्टविनायक के इस रूप के दर्शन करने आते हैं.

8

महाराष्ट्र के पुणे जिले के थेऊर में श्री चिंतामणि मंदिर स्थित है. ये मंदिर मुला-मुथा और भीमा नदियों के संगम पर बना हुआ है. मंदिर में विराजमान गणपति की मूर्ति स्वयंभू है और पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए है. चिंतामणि मंदिर में स्थित गणपति जी की सूंड बाईं और उनकी आंखों में हीरे जड़े हुए हैं. गोद में बैठे गजानन का ये स्वरूप जो भी देखता है, बस देखता ही रह जाता है. मंदिर में दर्शन मात्र से ही सभी तरह की चिंता दूर हो जाती है. यहीं पर रमाबाई पेशवा की समाधि भी है.

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