ज्ञान से निर्वाण तक भारत के 8 प्रसिद्ध बौद्ध मठों, जानिए इनके पीछे का इतिहास!

भारत में प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर
बिहार के गया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक विशाल प्रतीक है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है, जहां करीब 2500 साल पहले सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान प्राप्त किया और बुद्ध कहलाए. बोधगया में स्थित यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल दुनिया भर के बौद्धों के लिए सबसे अहम तीर्थ स्थलों में से एक है.
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि, यह वही स्थान है जहां बुद्ध ने 482 ईसा पूर्व में महापरिनिर्वाण अंतिम मुक्ति प्राप्त की थी. इस मंदिर की सबसे खास बात बुद्ध की 20 फुट लंबी विशाल लेटी हुई मूर्ति, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से उनकी मुक्ति का प्रतीक है. मंदिर के चारों तरफ स्तूप और मठ हैं, जिनमें रामभर स्तूप भी शामिल है, जिसे बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल भी माना जाता है.
हिमाचल प्रदेश धर्मशाला के नजदीक मैक्लोडगंज में स्थित नामग्याल मठ 14वें दलाई लामा का निजी मठ है और तिब्बत के बाहर तिब्बती बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा केंद्र है. मूल रूप से इसकी स्थापना 1575 में तीसरे दलाई लामा द्वारा की गई थी, और 1959 के तिब्बती विद्रोह के बाद इसे भारत में दुबारा स्थापित किया गया था.
अरुणाचल प्रदेश का तवांग मठ 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भारत का सबसे बड़ा और ल्हासा के पोटाला पैलेस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ है. 1680-81 में मेराक लामा लोद्रे ग्यात्सो द्वारा स्थापित यह तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग्पा संप्रदाय से जुड़ा है. 300 से ज्यादा अधिक भिक्षुओं का निवास स्थान यह मठ एक शिक्षण केंद्र और पूजा स्थल दोनों के रूप में कार्य करता है.
हिमाचल प्रदेश के ही सुदूर स्पीति घाटी में स्थित तबो मठ भारत के सबसे पुराने जीवित बौद्ध स्थलों में से एक है. पश्चिमी हिमालयी गुगे साम्राज्य के राजा येशे-ओ द्वारा 996 ईस्वी में स्थापित इसे आमतौर पर भित्ति चित्रों के लिए हिमालय का अंजता कहा जाता है.
सिक्किम के गंगटोक के बाहर रुमटेक मठ स्थित है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के कर्मा काग्यू वंश का केंद्र है. 16वीं शताब्दी में 9वें कर्मापा द्वारा निर्मित यह तिब्बत के त्सुरफू मठ की प्रतिकृति है.
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित वाट थाई मंदिर भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक रिश्तों को दर्शाता है. थाई राजा की यात्रा की याद में साल 1990 में निर्मित यह मंदिर थाई और भारतीय स्थापत्य शैली का मिला जुला मिश्रण है. जिसमें सुनहरे शिखर, जटिल नक्काशी और बुद्ध के जीवन के दृश्यों को दर्शाने वाली मूर्तियां शामिल हैं.
लद्दाख के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में स्थित हेमिस मठ भारत के सबसे बड़े और चर्चित बौद्ध मठों में से एक है. राजा सेंगे नामग्याल के शासनकाल में 1672 में स्थापित यह मठ तिब्बती बौद्ध धर्म की द्रुकपा परंपरा से जुड़ा हुआ है.