बदलते मौसम में बढ़ने लगी है ह्यूमिडिटी, इन उपायों से कमरे में पाएं चिप-चिप से राहत

ह्यूमिडिटी से हवा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा पता लगती है. जब हवा में नमी का स्तर 60 फीसदी से ज्यादा हो जाता है तो चिपचिपाहट और असहजता बढ़ने लगती है. Environmental Protection Agency (EPA) के अनुसार, घर के अंदर आदर्श ह्यूमिडिटी स्तर 30% से 50% के बीच होना चाहिए.
बारिश और गर्मी के कारण हवा में जलवाष्प की मात्रा बढ़ने लगती है. अगर घर में वेंटिलेशन अच्छा नहीं है तो हवा नहीं चलने के कारण नमी रह जाती है. इससे घर के अंदर उमस होने लगती है और चिपचिपापन महसूस होता है.
ह्यूमिडिटी से स्किन पर चिपचिपाहट महसूस होती है. वहीं, पसीने के कारण जलन या फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. वहीं, अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है.
उमस ज्यादा होने पर नींद नहीं आती है, जिसका असर डेली रुटीन पर भी पड़ता है. ऐसे में लोगों में थकान और चिड़चिड़ापन ज्यादा बढ़ जाता है.
अगर घर में ज्यादा चिपचिपापन लग रहा है तो एक कटोरी में नमक या बेकिंग सोडा भरकर कमरे के कोनों में रख दें. ये दोनों चीजें नेचुरल तरीके से नमी सोख लेती हैं.
आप एक्टिवेटेड चारकोल का इस्तेमाल करके भी घर के अंदर से ह्यूमिडिटी दूर कर सकते हैं. दरअसल, चारकोल नमी और गंध को सोखने की क्षमता रखता है.
पीस लिली और बोस्टर्न फर्न जैसे इनडोर पौधे हवा में मौजूद एक्स्ट्रा नमी को सोख लेते हैं. हालांकि, इनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना चाहिए.