ड्राई क्लीन में कपड़े कैसे धोए जाते हैं?इन कपड़ो की धूलाई इतनी महंगी क्यों होती है, जानें
कभी-कभी हमारे कुछ कपड़ों को विशेष केयर की जरूरत होती है. जैसे - सिल्क, वूल, लिनेन जैसे सॉफ्ट और नाजुक कपड़े.इन्हें साधारण तरीके से धोना मुश्किल होता है.ऐसे में हम इन कपड़ों को ड्राई क्लीनिंग के लिए देते हैं.
ड्राई क्लीनिंग एक खास तरह के केमिकल सॉल्यूशन का इस्तेमाल करके कपड़ों से गंदगी हटाई जाती है, इस प्रक्रिया में कपड़े को नुकसान नहीं पहुंचता. ये थोड़ा महंगा पड़ता है क्योंकि इसमें हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल न हो, इसका ख्याल रखना पड़ता है. लेकिन महंगे कपड़ों को सही सलामत रखने के लिए ड्राई क्लीनिंग करवाना पड़ता है.
ड्राई क्लीनिंग की प्रक्रिया में कपड़ों को साफ करने के लिए कुछ खास केमिकल्स का उपयोग किया जाता है. इनमें सबसे कॉमन परक्लोरोएथिलीन (Perchloroethylene) नामक क्लोरीनेटेड सॉल्वेंट का इस्तेमाल होता है. यह केमिकल कपड़ों में मौजूद गंदगी, तेल-मैल और दाग-धब्बों को आसानी से हटा देता है. इसके अलावा पेट्रोलियम आधारित सॉल्वेंट्स जैसे - स्टॉडार्ड सॉल्वेंट, हाइड्रोकार्बन सॉल्वेंट आदि का भी मिलाया जाता है.
ड्राई क्लीनिंग के लिए एक बड़ी सी मशीन का इस्तेमाल होता है. यह वॉशिंग मशीन जैसी दिखती है, बस थोड़ी बड़ी होती है.पहले कपड़े मशीन में रखकर उसका दरवाजा बंद किया जाता है. फिर सॉल्वेंट डाल कर मशीन चालू की जाती है. मशीन अंदर के ड्रम को घुमाते हुए सॉल्वेंट को कपड़ों पर फैलाती है जिससे वे साफ हो जाते हैं. 8-10 मिनट बाद मशीन बंद करके सॉल्वेंट निकाल दिया जाता है और कपड़े सुखाने के लिए निकाल लिए जाते हैं. ड्राई क्लीनिंग में सर्फ और पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
केमिकल, पेट्रोलियम सॉल्वेंट्स काफी महंगे मिलते हैं इसलिए कपड़े जब ड्राई क्लीनिंग के लिए देते हैं तो एक कपड़े कीमत 200-300 रुपए तक का लग जाता है.