साइलेंट किलर हैं ये 7 बीमारियां...जानें इनके नाम
आर्टरी डिजीज दिल से जुड़ा रोग है.इसमें कोरोनरी आर्टरी सिकुड़ जाती है, जो दिल को काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन पहुंचाती है. इसके चलते दिल का दौरा पड़ सकता है.
स्लीप एपनिया एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है. इसमें खर्राटों की दिक्कत के साथ ही नींद में तेज सांस लेने की दिक्कत हो सकती है.इसमें सोए हुए व्यक्ति की अचानक कुछ सेकेंड के लिए सांस रुक जाती है.
महिलाओं में खून की कमी के कारण एनीमिया की समस्या हो जाती है. इस रोग में रेड ब्लड सेल की कमी हो जाती है. इसके कारण थकान कमजोरी सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या होती है.
ओस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ा रोग है. इसके चलते हड्डियां अंदर से खोखली हो जाती है. हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है. फ्रैक्चर का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है.
आजकल युवा भी कोलेस्ट्रॉल की समस्या से दो चार हो रहे हैं. कोलेस्ट्रॉल शरीर में अचानक से कब बढ़ता है. इसका भी पता नहीं चल पाता.जब ये हद से ज्यादा बढ़ने लगता है तब जाकर इसके लक्षण नजर आते हैं.दरअसल ये खराब लाइफस्टाइल, बिगड़े खान पान और शारीरिक गतिविधि न करने के कारण होता है.
डायबिटीज एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, ये एक लाइलाज बीमारी है. ये शरीर में कब बढ़ती है इसका पता ही नहीं चल पाता. डायबिटीज होने पर थकान, बार बार पेशाब लगना, प्यास लगना, वजन घटना जैसे लक्षण शामिल है.
हाई बीपी की समस्या भी एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता का विषय बन चुका है. इसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बना रहता है.