Meningitis: नवजात शिशु में मेनिनजाइटिस के लक्षण क्या होते हैं? जानें इससे बचने का तरीका
मेनिनजाइटिस झिल्लियों की सूजन है, जिसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली मेनिन्जेस शामिल हैं. नवजात शिशु जो अपने जन्म के पहले महीने में मेनिनजाइटिस होने का हाई रिस्क होता है क्योंकि उनकी इम्युनिटी अभी कमजोर होती है. उन्हें संक्रमणों से बचाने का कोई मौका नहीं होता है. असल में नवजात संक्रमण के कारण ज्यादातर मामलों में मृत्यु या लंबे वक्त तक विकलांगता होती है. यह देखा गया है कि सेप्सिस से पीड़ित 20% शिशुओं में मेनिनजाइटिस का भी इलाज होता है और समय से पहले जन्मे शिशुओं के लिए यह प्रतिशत और भी अधिक है.
मेनिनजाइटिस का कारण बनने वाले बैक्टीरिया माताओं से ट्रांसप्लासेंटल हो सकते हैं या समुदाय से प्राप्त हो सकते हैं. मेनिनजाइटिस से पीड़ित नवजात शिशुओं के लिए, स्थिति अक्सर गंभीर होती है, और उन्हें एनआईसीयू में इलाज करवाने की आवश्यकता होती है. यह जानना अच्छा है कि नवजात शिशुओं में मेनिनजाइटिस के लक्षण क्या हैं ताकि सही ढंग से उनका इलाज हो सके. इसके शुरुआती लक्षण है बुखार, खाना खाने से मना करना,ऐंठन.
मेनिनजाइटिस के शुरुआती लक्षण देखते ही इलाज जरूरी है अगर इसका इलाज वक्त रहते नहीं किया गया तो इसके कारण गंभीर विकलांगता हो सकते हैं. इलाज में आमतौर पर एनआईसीयू में तीन सप्ताह तक चलने वाले एंटीबायोटिक्स का कोर्स शामिल होता है और यह केवल शुरुआती निदान की आवश्यकता पर जोर देता है.नवजात मैनिंजाइटिस के बाद जीवित बचे लोग अक्सर गंभीर जटिलताओं का शिकार हो जाते हैं. जिनमें शामिल हैं.
कभी-कभी, इस बीमारी को शुरुआती इलाज और कठोर चिकित्सा पद्धति से कम किया जा सकता है. इसलिए, मैनिंजाइटिस का शुरुआती आकलन और सही इलाज बेहद जरूरी है. माताओं का स्वास्थ्य: गर्भवती होने के दौरान बुखार या संक्रमण वाली महिलाओं का उचित तरीके से इलाज किया जाना चाहिए ताकि उनके बच्चे इस बीमारी के संपर्क में न आ सकें.
संक्रमण के जोखिम को रोकने के लिए प्रसव स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में किया जाना चाहिए. शिशु को जन्म लेने के पहले छह महीनों में केवल स्तनपान कराया जाना चाहिए ताकि उसे आवश्यक पोषक तत्वों के साथ-साथ एंटीबॉडी भी मिल सकें. लक्षणों के लिए तत्काल देखभाल: लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत होती है ताकि जांच की जा सके और अस्वस्थ शिशुओं, जैसे कि बुखार वाले या दूध पीने से इनकार करने वाले शिशुओं के लिए एंटीबायोटिक्स दिए जा सकें. समय से पहले जन्म की रोकथाम: समय से पहले जन्म की दर को कम करना होगा। समय से पहले जन्मे शिशुओं में मेनिन्जाइटिस का जोखिम सबसे ज़्यादा होता है.