Curd Health Myths: सावधानी या सिर्फ गलतफहमी, दही से जुड़ी इन 7 बातों पर कहीं आप भी तो यकीन नहीं करते?

दही भारतीय खानपान का अहम हिस्सा रहा है, लेकिन इसे लेकर आज भी कई गलतफहमियां फैली हुई हैं. कोई इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानता है, तो कोई नुकसान के डर से इससे दूरी बना लेता है.
यह मानना गलत है कि दही खाने से सर्दी, खांसी या साइनस हो जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, दही बलगम नहीं बढ़ाता और परेशानी सिर्फ कुछ लोगों की संवेदनशीलता के कारण होती है.
अक्सर कहा जाता है कि दही रात में नहीं खाना चाहिए, जबकि ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है. जिनका पाचन ठीक है, उनके लिए रात में सादा दही सुरक्षित माना जाता है.
दही को वजन बढ़ाने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है. इसमें मौजूद प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स भूख को नियंत्रित करने और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद करते हैं.
कुछ लोग दही को पाचन के लिए खराब मानते हैं, जबकि ताजा दही आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है. परेशानी तब होती है, जब दही बहुत खट्टा, ज्यादा पुराना या जरूरत से ज्यादा खाया जाए.
यह धारणा भी गलत है कि खाने के साथ दही नहीं खाना चाहिए. पारंपरिक भारतीय भोजन में दही पाचन सुधारने और ब्लड शुगर संतुलित रखने में मदद करता है.
डायबिटीज के मरीजों को अक्सर दही से दूर रहने की सलाह दी जाती है, जो पूरी तरह सही नहीं है. सादा और बिना मीठा दही सीमित मात्रा में सुरक्षित माना जाता है.
कई लोग मानते हैं कि हर पैकेट वाला दही प्रोबायोटिक होता है, जबकि ऐसा नहीं है. घर का बना ताजा दही या सही लेबल वाला प्रोबायोटिक दही बेहतर विकल्प होता है.