एक साथ कितने हार्ट अटैक झेल सकता है हमारा दिल, कब मुश्किल हो जाता है जान बचाना?

हार्ट अटैक का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर बैठ जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कई बार यह बिना ज्यादा चेतावनी दिए अचानक आ जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक इंसान कितनी बार हार्ट अटैक झेल सकता है? क्या पहली बार हार्ट अटैक आने के बाद भी दिल पहले जैसा काम कर सकता है? और आखिर ऐसा कौन-सा समय होता है जब मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है? इन सवालों के जवाब हर किसी को पता होने चाहिए, क्योंकि आजकल कम उम्र के लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक तब आता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है. आमतौर पर यह रुकावट कोलेस्ट्रॉल, फैट और दूसरी चीजों के जमा होने से बनती है. जब खून का बहाव रुक जाता है तो दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और उनका नुकसान शुरू हो जाता है. अगर मय पर इलाज न मिले तो दिल का कुछ हिस्सा हमेशा के लिए कमजोर हो सकता है.
अब बात उस सवाल की, जो सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि एक व्यक्ति कितनी बार हार्ट अटैक झेल सकता है. डॉक्टरों के अनुसार इसका कोई तय जवाब नहीं है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि अटैक कितना गंभीर था, दिल को कितना नुकसान पहुंचा और इलाज कितनी जल्दी मिला. कई लोग एक से ज्यादा हार्ट अटैक के बाद भी सामान्य जीवन जीते हैं. हालांकि बार-बार हार्ट अटैक आने से दिल की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और खतरा बढ़ता जाता है. कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहली और दूसरी बार समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज के बचने की संभावना अच्छी रहती है, लेकिन बार-बार होने वाले अटैक दिल की कार्यक्षमता को काफी कम कर सकते हैं.
असल खतरा तब बढ़ जाता है जब हार्ट अटैक के बाद मरीज अपनी जीवनशैली नहीं बदलता. जैसे धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा देते हैं. कई बार लोग पहली बार बच जाने के बाद लापरवाह हो जाते हैं, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि पहला हार्ट अटैक अक्सर एक चेतावनी की तरह होता है. अगर इसके बाद भी सावधानी न बरती जाए तो अगला अटैक ज्यादा गंभीर हो सकता है.
हार्ट अटैक के कुछ सामान्य लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जैसे छाती में दबाव या दर्द, बाएं हाथ में दर्द, गर्दन या जबड़े में खिंचाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, अचानक कमजोरी महसूस होना या चक्कर आना इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं. कई मामलों में महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में लक्षण सामान्य से अलग भी हो सकते हैं. इसलिए शरीर के किसी भी असामान्य संकेत को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है.
जान बचाना सबसे मुश्किल तब हो जाता है जब हार्ट अटैक के बाद दिल का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो जाए या मरीज को तुरंत इलाज न मिले. यदि दिल की धड़कन अचानक रुक जाए, जिसे कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है, तो स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है. ऐसे मामलों में हर मिनट की देरी खतरनाक साबित हो सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि हार्ट अटैक के शुरुआती घंटों में मिला इलाज दिल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है और मरीज की जान बचा सकता है.
अच्छी बात यह है कि हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके लिए रोजाना थोड़ी एक्सरसाइज करें, फल और सब्जियां ज्यादा खाएं, तंबाकू और शराब से दूरी बनाएं, वजन नियंत्रित रखें और नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें. याद रखिए, हार्ट अटैक हमेशा अचानक नहीं आता, बल्कि इसके पीछे कई सालों की खराब आदतें काम करती हैं. इसलिए दिल का ख्याल आज से ही रखना शुरू कर दें, क्योंकि स्वस्थ दिल ही लंबी और बेहतर जिंदगी की सबसे बड़ी कुंजी है.