Burnt Body Postmortem: जले हुए शवों का कैसे किया जाता है पोस्टमार्टम? जानिए अस्त व्यस्त बॉडी में क्या और कैसे देख पाते हैं डॉक्टर

अक्सर काफी लोगों को लगता है कि पोस्टमार्टम, एक CT Scan या फिर X-Ray का प्रोसेस होता है, लेकिन इसका सच कुछ और है. पोस्टमार्टम का मतलब होता है यह पता करना कि आखिर मृतक की मृत्यु कैसे हुई है और वह कितने समय पहले मरा है. जब किसी की मौत किसी हादसे, आग, मर्डर या अचानक हुई बीमारी से होती है, तो कानून के मुताबिक पोस्टमार्टम जरूरी होता है. इससे यह पता चलता है कि व्यक्ति की मौत आग से जलने से हुई, धुएं से दम घुटने से हुई, या मौत किसी और वजह से पहले ही हो गई थी और बाद में शव जल गया. ये सारी चीजों को पता करने के लिए पोस्टमार्टम किया जाता है.
अक्सर काफी लोगों को लगता है कि पोस्टमार्टम एक CT Scan या फिर X-Ray का प्रोसेस होता है, लेकिन इसका सच कुछ और है. पोस्टमार्टम का मतलब होता है यह पता करना कि आखिर मृतक की मृत्यु कैसे हुई है और वह कितने समय पहले मरा है. जब किसी की मौत किसी हादसे, आग, मर्डर या अचानक हुई बीमारी से होती है, तो कानून के मुताबिक पोस्टमार्टम जरूरी होता है. इससे यह पता चलता है कि व्यक्ति की मौत आग से जलने से हुई, धुएं से दम घुटने से हुई, या मौत किसी और वजह से पहले ही हो गई थी और बाद में शव जल गया. इन सभी चीजों को पता करने के लिए पोस्टमार्टम किया जाता है.
जली हुई बॉडी के पोस्टमार्टम की चर्चा इसलिए ज्यादा खास होती है क्योंकि आम पोस्टमार्टम में डॉक्टर शरीर के अंगों, चोटों और खून के निशान देखकर काफी कुछ समझ लेते हैं. लेकिन जब मृतक का शरीर बुरी तरह जल जाता है, तो त्वचा, मांसपेशियां और कई बार हड्डियां भी जल जाती हैं. ऐसे में शरीर की पहचान करना और मौत की वजह पता करना दोनों ही बहुत मुश्किल हो जाता है.
जले हुए शवों की पोस्टमार्टम प्रक्रिया की बात करें तो सबसे पहले फॉरेंसिक डॉक्टर देखते हैं कि शरीर में सांस लेने की नली और फेफड़ों के अंदर कालिख है या नहीं. इससे यह पता चलता है कि आग लगने के समय पर यह आदमी जिंदा था और उसने आग के धुएं को सांस लेते समय खींचा होगा. इसे एंटी-मॉर्टम यानी मौत से पहले का सबूत कहा जाता है. अगर सांस की नली में कालिख नहीं मिलती, तो यह संकेत हो सकता है कि व्यक्ति की मौत आग लगने से पहले ही हो गई थी.
इसके अलावा डॉक्टर शव के खून का सैंपल लेकर उसमें कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की मात्रा की जांच करते हैं. अगर खून में इस गैस की मात्रा ज्यादा मिलती है, तो यह पता चलता है कि व्यक्ति आग लगने के दौरान सांस ले रहा था. यही वजह है कि ज्यादातर आग से होने वाली मौतों में लोग जलने से नहीं, बल्कि धुएं और जहरीली गैस से ही उनकी मौत हो जाती है.
आज के समय में पोस्टमार्टम से पहले शव का एक्स-रे या CT Scan भी किया जाता है. इससे शरीर के अंदर की चोटें, टूटी हड्डियां या किसी भी चीज का पता लगाया जा सकता है, जैसे गोली का पता लगाना, जो बाहर से दिखना नामुमकिन होता है.