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Doctors Save Mother Or Baby: डिलीवरी के वक्त परेशानी होने पर डॉक्टर मां को बचा सकता है या बच्चे को? ये है नियम

एबीपी लाइव   |  07 Mar 2025 08:05 PM (IST)
Doctors Save Mother Or Baby: डिलीवरी के वक्त परेशानी होने पर डॉक्टर मां को बचा सकता है या बच्चे को? ये है नियम

Doctors Save Mother Or Baby: एक महिला के लिए मां बनना बहुत ही सुखद एहसास है. नौ महीने का ये सफर तमाम शारीरिक और मानसिक बदलावों से भरा हुआ होता है. ये सिर्फ एक महिला ही नहीं बल्कि पूरे परिवार का जीवन बदलकर रख देता है. जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता मां और बेबी के बीच एक खास रिश्ता बनता जाता है. बेबी के आने से पहले परिवार के सभी लोगों को बहुत उम्मीदें होती हैं. आप उसके लिए नए कपड़े, खिलौने और ढेर सारा सामान खरीदते हैं. बच्चे के लिए हर शौक पूरे किए जाते हैं, फिर आता है डिलीवरी का वक्त. हॉस्पिटल लेकर जाने के बाद अगर डिलीवरी से पहले डॉक्टर कहता है कि मां और बच्चा दोनों की जान को खतरा है. ऐसे में डॉक्टर का फर्ज क्या बनता है और नियम क्या कहता है कि मां और बच्चे में से किसकी जान बचाई जानी चाहिए. आइए जानते हैं.

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मेडिकल की भाषा में कहें तो प्रेग्नेंसी के ट्राइमेस्टर्स में से किसी भी ट्राइमेस्टर में मां या बच्चे की जान को खतरा हो सकता है. लेकिन ऐसी कंडीशन में डॉक्टर मां की जिंदगी बचाएगा.

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इस दौरान अगर डॉक्टर बिना मां की जान को खतरे में डाले बच्चे की जान बचा सकता है तो बच्चे की भी जान बचाई जाएगी, लेकिन प्राथमिकता मां की जान की होती है.

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अगर गर्भावस्था के दौरान मां की जिंदगी खतरे में है, तो वो बच्चे की वजह से ही है. क्योंकि अगर मां की मौत हो जाती है, तो बच्चा मिनटों में मर जाएगा.

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Quora पर एक डॉक्टर ने कहा कि अगर भ्रूण गर्भाशय के अंदर नहीं है और वो यूट्रस की बाहरी दीवार पर है तो हम सिर्फ मां की जान बचाते हैं, नहीं तो एनआईसीयू में बच्चे के साथ मां की जान बचाते हैं.

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एक मां का जीवन एक अजन्मे बच्चे से ज्यादा महत्वपूर्णं है. उसके पास काम का एक्सपीरियंस कमिटमेंट्स और परिवार का प्यार होता है.

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भले ही एक अजन्मे बच्चे की मौत उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दर्दनाक असर डाले, लेकिन फिर भी इस केस में मां को ही बचाया जाता है.

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एक नवजात बच्चा बिना मां के जिंदा नहीं रह सकता है. क्योंकि नन्हे बच्चे को केयर और पोषण चाहिए होता है वो बिना मां के नहीं मिल सकता है.

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