'शुगर' को कंट्रोल में ला सकती है बासी रोटी! जानिए ऐसा क्यों कहते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट के मुताबिक, बासी रोटियां ब्रेकफास्ट में सब्जी और दूध के साथ अच्छी लगती हैं. बासी रोटी खाने का सबसे अच्छा परिणाम आपको तब मिलेगा जब आप इसे पकाने के 12 से 15 घंटों के भीतर खा लेते हैं.
रोटी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है. यही वजह है कि उन्हें प्रोटीन और सब्जियों से भरपूर भोजन के साथ खाना सबसे अच्छा माना जाता है. हालांकि ज्यादा रोटियों के सेवन से बचने का प्रयास करना चाहिए.
गेहूं में ग्लूटेन ज्यादा मात्रा में होता है, जिससे इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या हो सकती है और डाइजेशन सिस्टम में जलन पैदा हो सकती है.
12 घंटे तक खुली हवा के कॉनेटैक्ट में रहने के बाद रोटी की बनावट, स्वाद और यहां तक कि स्टार्च की संरचना में भी बदलाव आने लगता है. बासी और ताजी रोटी के बीच ग्लाइसेमिक इंडेक्स का भी काफी अंतर होता है. हालांकि ब्लड शुगर के लेवल पर उतना प्रभाव नहीं डालता है.
अगर खाने को सही से स्टोर नहीं किया जाता है तो बैक्टीरिया या मोल्ड के पैदा होने का खतरा बना रहता है. वैसे तो 12 घंटे से बाहर रखी हुई रोटी को ठीक से स्टोर करके खाया जा सकता है. लेकिन अगर आप रोटी से ज्यादा से ज्यादा पोषण हासिल करना चाहते हैं तो इसे ताजी ही खाएं. क्योंकि बासी होने पर इसके स्वाद और बनावट में बदलाव होने लगता है.