इनफर्टिलिटी से जूझ रही हैं महिलाएं? IVF से पहले और नेचुरल कंसीव के लिए अपनाएं ये 5 एक्सरसाइज
ब्रिस्क वॉकिंग एक आसान लेकिन असरदार एक्सरसाइज मानी जाती है. यह शरीर में इन्सुलिन सेंसटिविटी को बेहतर बनाती है. ओव्यूलेशन को सपोर्ट करती है और वजन कंट्रोल में मदद करती है. खासतौर पर ओवरवेट, मोटापा या पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं में इन्सुलिन रेजिस्टेंस फर्टिलिटी को प्रभावित करती है. कई रिसर्च बताती है कि मीडियम लेवल की एक्सरसाइज करने वाली महिलाओं में ओव्युलेशन और रिप्रोडक्टिव हेल्थ बेहतर होती है. आमतौर पर हफ्ते के ज्यादातर दिनों में 30 से 35 मिनट तेज चलना फायदेमंद माना जाता है.
एरोबिक एक्सरसाइज शरीर के अंदरूनी चर्बी कम करने और इंसुलिन के सही उपयोग में मदद करती है. इससे हार्मोन बैलेंस बेहतर होता है जो अनोव्यूलेटरी इनफर्टिलिटी और पीसीओएस से जुड़ी समस्याओं में मददगार है. रिसर्च के अनुसार पीसीओएस और मोटापे से जूझ रही महिलाओं में एरोबिक एक्सरसाइज ओव्यूलेशन दोबारा शुरू करने में मदद कर सकती है. वहीं मॉडरेट एरोबिक एक्सरसाइज को नियमित रूप से करने से प्रेगनेंसी के चांस बेहतर होते हैं.
इसके अलावा स्ट्रेंथ या रेजिस्टेंस ट्रेनिंग मसल्स बनाने के साथ-साथ इंसुलिन सेंसिटिविटी और हार्मोन बैलेंस को बेहतर करती है. स्क्वैट्स, पुश-अप्स या हल्के वेट्स जैसी एक्सरसाइज मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करती है. कई रिसर्च में सामने आया है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से वजन में थोड़ी कमी भी फर्टिलिटी पर पॉजिटिव असर डाल सकती है, खासतौर पर पीसीओएस से जुड़ी इनफर्टिलिटी में.
वहीं योग में हल्की स्ट्रेचिंग, सांस की एक्सरसाइज और रिलैक्सेशन शामिल होती है जो फर्टिलिटी के लिए फायदेमंद मानी जाती है. रिसर्च के अनुसार, योग स्ट्रेस कम करने, हार्मोन बैलेंस, ओवेरियन फंक्शन और मेंस्ट्रुअल साइकिल को सही करने में मदद करता है. IVF ट्रीटमेंट के दौरान योग और माइंड-बॉडी प्रोग्राम अपनाने वाली महिलाओं में इम्प्लांटेशन और प्रेग्नेंसी के अच्छे रिजल्ट देखे गए हैं.
माइंड बॉडी प्रोग्राम में योग, हल्की स्ट्रेचिंग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, रिलैक्सेशन टेक्निक और काउंसलिंग शामिल होती है. इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान मानसिक तनाव हार्मोन पर असर डाल सकता है. ऐसे प्रोग्राम तनाव को कम करने में मदद करते हैं और ट्रीटमेंट को बेहतर तरीके से फॉलो करने में मददगार होते हैं.