फैटी लिवर अब टेंशन की बात नहीं, डाइट में शामिल करें ये फूड; इतना होगा फायदा
कद्दू के बीजों को एवोकाडो के साथ मिलाने से स्मार्ट लिवर-फ्रेंडली डाइट तैयार होती है, जो फैटी लिवर डिजीज (नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज) को रोकने में मददगार साबित हो सकती है. एवोकाडो में हेल्दी मोनोअनसैचुरेटेड फैट और ग्लूटाथियोन भी होता है. कद्दू के बीजों में मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड ज्यादा होता है, जो लिवर की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं.
ऑलिव ऑयल के साथ पालक खाने से लिवर की हेल्थ बूस्ट होती है. पालक में क्लोरोफिल काफी ज्यादा होता है, जो विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और लिवर में फैट को कम करने में मदद कर सकता है. ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) खासकर एक्स्ट्रा वर्जिन मोनोअनसैचुरेटेड फैट से भरा होता है, जो लिपिड मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है.
ब्लैक बीन अपने पोषक तत्वों से भरपूर प्रोफाइल और मेटाबोलिज्म पर सकारात्मक प्रभावों के कारण फैटी लीवर डिजीज (नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज) को रोकने में मददगार साबित हो सकता है. इसमें घुलनशील फाइबर होते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं. ब्लैक बीन में पॉलीफेनोल और फ्लेवोनोइड्स की मात्रा अधिक होती है.
डार्क चॉकलेट में एपिकैटेचिन और कैटेचिन जैसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो लिवर टिश्यू में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करते हैं. डार्क चॉकलेट की थोड़ी मात्रा का नियमित सेवन इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.
एडैमेम (कच्चे सोयाबीन की फली) में बिना सैचुरेटेड फैट के हाई क्वालिटी प्रोटीन पाया जाता है. सोया में पाए जाने वाले जेनिस्टीन और डेडजीन लिवर में फैट और सूजन को कम करने में मददगार होते हैं.
बादाम और काजू संतुलित आहार के रूप में खाए जाने पर फैटी लीवर की रोकथाम में सहायक हो सकते हैं. इन दोनों में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट होते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.