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लाइफ एंड डेथ सिचुएशन में शरीर कैसे खुद को कंट्रोल करता है? जानिए 7 चौंकाने वाले फैक्ट्स

एबीपी लाइव   |  01 Jan 2026 10:19 AM (IST)
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खतरा सामने आते ही दिमाग का सोचने वाला हिस्सा पीछे चला जाता है. उस समय शरीर यह नहीं सोचता कि क्या सही है या लोग क्या कहेंगे, दिमाग सिर्फ एक बात पर ध्यान देता है कैसे बचा जाए. इसीलिए लोग बिना सोचे कूद जाते हैं, भागने लगते हैं या किसी को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल देते हैं. यह सब अपने आप होता है, प्लान बनाकर नहीं.

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कई लोगों ने बताया है कि खतरनाक हालात में सब कुछ स्लो मोशन में होता हुआ लगता है या पूरी घटना झटके में खत्म हो जाती है. असल में उस समय दिमाग सामान्य से कहीं ज्यादा जानकारी एक साथ पकड़ रहा होता है. बाद में जब हम उन पलों को याद करते हैं, तो लगता है कि वह समय बहुत लंबा था.

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लाइफ एंड डेथ सिचुएशन में शरीर दर्द को अस्थायी रूप से बंद कर देता है. कई बार लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं, लेकिन उन्हें तब तक दर्द महसूस नहीं होता जब तक खतरा टल नहीं जाता. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर एंडोर्फिन नामक केमिकल छोड़ता है, जो दर्द के संकेतों को दबा देता है. सुरक्षित होते ही दर्द अचानक तेज महसूस होने लगता है.

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खतरे के समय आसपास की दुनिया जैसे गायब सी हो जाती है. नजर सिर्फ उसी चीज पर रहती है जो सबसे खतरनाक लग रही हो या जिससे बचने का रास्ता दिख रहा हो.इसे टनल विजन कहते हैं. इसी वजह से बाद में लोग कहते हैं इतनी बड़ी चीज मैंने देखी ही नहीं,

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आपने सुना होगा कि कोई इंसान खतरे में भारी चीज उठा लेता है या असंभव सा काम कर देता है. यह कोई अफवाह नहीं है. खतरे के समय शरीर में एड्रेनालाईन बहुत तेजी से निकलता है. यह मांसपेशियों को उनकी सामान्य सीमा से ज्यादा ताकत देता है. हालांकि यह ताकत थोड़े समय के लिए होती है. इसके बाद शरीर थकान, कमजोरी या कंपकंपी महसूस करता है.

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किसी जानलेवा घटना के बाद लोग अक्सर कहते हैं कि उन्हें सब कुछ ठीक से याद नहीं, घटनाएं सही क्रम में नहीं जुड़ पातीं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तनाव हार्मोन दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करते हैं जो यादों को व्यवस्थित करता है. इसलिए यादें कहानी की तरह नहीं, बल्कि टुकड़ों में सेव हो जाती हैं.

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खतरा खत्म होते ही कई लोगों के हाथ-पैर कांपने लगते हैं. कुछ को कमजोरी महसूस होती है या पेशाब पर कंट्रोल नहीं रहता है. यह डर या कमजोरी नहीं है. यह शरीर का तरीका है जमा हुए तनाव को बाहर निकालने का, शरीर कह रहा होता है अब खतरा खत्म हो गया है, अब आराम करो.

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