Roadside Namaz: इन देशों में सड़क पर नहीं पढ़ सकते नमाज, लिस्ट में मुस्लिम देश भी हैं शामिल

Roadside Namaz: दुनिया भर के कई देशों में सख्त कानून और सार्वजनिक व्यवस्था के नियम सड़कों, फुटपाथ या फिर सार्वजनिक जगहों को रोककर नमाज पढ़ने या फिर धार्मिक सभाएं करने पर रोक लगाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह पश्चिमी धर्मनिरपेक्ष देशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसमें कुछ मुस्लिम बहुल देश भी शामिल हैं. आइए जानते हैं उन सभी देशों के बारे में.
संयुक्त अरब अमीरात में खासकर दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में सड़कों को रोक कर, गाड़ियां गलत तरीके से पार्क करके या फिर फुटपाथों पर कब्जा करके नमाज पढ़ना सार्वजनिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाता है. ट्रैफिक या पैदल चलने वालों की आवाजाही में रुकावट डालने पर 1000 दिरहम तक का भारी जुर्माना लग सकता है.
इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों का घर होने के बावजूद सऊदी अरब लोगों को नमाज के लिए सड़कों या फिर हाईवे को रोकने की इजाजत नहीं देता. सरकार का कहना है कि सड़क आम नागरिक, आपातकालीन वाहन और एंबुलेंस के लिए खुली रहनी चाहिए. साथ ही पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर सकती है.
फ्रांस 2011 में सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने पर पूरी तरह से रोक लगाने वाले पहले यूरोपीय देशों में से एक बन गया था. यह फैसला देश की मजबूत धर्मनिरपेक्ष नीति से जुड़ा था. इस नीति के तहत सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक जगहें ऐसी गतिविधियों से मुक्त रहनी चाहिए जो ट्रैफिक और नागरिक व्यवस्था में रूकावट डालती हैं.
चीन में खुली सार्वजनिक जगहों पर धार्मिक सभाओं को काफी सख्ती से कंट्रोल किया जाता है. अधिकारी सार्वजनिक नमाज की गतिविधियों पर रोक लगाते हैं इसमें खुले में नमाज पढ़ना भी शामिल है.
कनाडा के क्यूबेक प्रांत ने कुछ सार्वजनिक संस्थानों में सामूहिक नमाज पर रोक लगाने वाले कानून लागू किए हैं. ये नियम सरकारी पैसे से चलने वाले संस्थानों के अंदर नमाज के लिए अलग जगह बनाने को भी हतोत्साहित करते हैं.
हालांकि कई देश सड़कों पर प्रार्थना करने पर रोक लगाते हैं लेकिन कई सरकारें प्रार्थना के लिए तय जगह और धार्मिक सुविधा भी देती हैं.