Stray Dogs: क्या है ABC Framework, आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच जान लें नियम?

Stray Dogs: आवारा कुत्तों और लोगों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है. भारत के सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशील सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पिछले आदेश को वापस लेने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और हवाई अड्डों के पास पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी या फिर टीकाकरण के बाद वापस उन्हीं जगहों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए. इसी बीच आइए जानते हैं क्या है पशु जन्म नियंत्रण ढांचा.
पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 केंद्र सरकार द्वारा आवारा कुत्तों की आबादी को बिना किसी क्रूरता के प्रबंधित करने के लिए लाए गए थे. इस ढांचे के तहत नगर निगम और पंचायत जैसे स्थानीय निकायों की यह जिम्मेदारी है कि वे आवारा कुत्तों को मानवीय तरीकों से पकड़ें, उनकी नसबंदी करें और आगे की कार्रवाई से पहले उन्हें रेबीज का टीका लगाएं.
नसबंदी के अलावा पकड़े गए हर आवारा कुत्ते को रेबीज रोधी टीका लगाना जरूरी है. इस कदम का मुख्य मकसद रेबीज संक्रमण के बढ़ते खतरे को कम करना और शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों में लोगों के स्वास्थ्य और पशु कल्याण को बेहतर बनाना है.
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया है कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हवाई अड्डा जैसी संवेदनशील सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए. कोर्ट के मुताबिक इन जगहों से पकड़े गए कुत्तों को वापस उन्हीं इलाकों में नहीं छोड़ा जाना चाहिए.
इस नियम के तहत आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति सिर्फ उन आधिकारिक तौर पर फीडिंग जोन में है जिन्हें स्थानीय अधिकारियों या फिर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने पहचाना हो. सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ या फिर आम रास्तों पर कुत्तों को खाना खिलाना मना है.
यह ढांचा साफ तौर पर कहता है कि स्वस्थ आवारा कुत्तों को मारा नहीं जा सकता. हालांकि किसी भी रोग से पीड़ित, रेबीज संक्रमण से ग्रसित या फिर काफी ज्यादा आक्रामक कुत्तों को जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त पशु चिकित्सा पर्यवेक्षक और चिकित्सा दिशा निर्देशों के तहत इच्छामृत्यु दी जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के हर जिले के लिए नसबंदी और टीकाकरण कार्य हेतु कम से कम एक एबीसी केंद्र स्थापित करना अनिवार्य कर दिया है. न्यायालय ने सभी राज्यों के हाईकोर्ट को इस कार्य की निगरानी करने का निर्देश दिया है.