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क्यों कहा जाता था कि कभी नहीं डूबेगा टाइटैनिक, क्या लगा था इसमें ऐसा?

एबीपी लाइव   |  03 Jan 2026 11:30 AM (IST)
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टाइटैनिक का पूरा नाम RMS Titanic था, क्योंकि यह ब्रिटेन की रॉयल मेल सर्विस के लिए चिट्ठियां और पार्सल भी ले जाता था. यह जहाज आयरलैंड के बेलफास्ट शहर में हार्लैंड एंड वूल्फ कंपनी ने बनाया था. इसकी लंबाई लगभग 269 मीटर थी, चौड़ाई 28 मीटर और ऊंचाई करीब 53 मीटर, इसमें 3 बड़े इंजन लगे थे. रोजाना लगभग 600 टन कोयला जलता था. इस जहाज में करीब 3300 लोगों के रहने की जगह थी. यह बेहद आलीशान था और इसकी फर्स्ट क्लास टिकट बहुत महंगी मानी जाती थी.

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टाइटैनिक को उस समय की सबसे आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना माना गया था. इसमें कई वाटरटाइट कंपार्टमेंट (पानी रोकने वाले कमरे) बनाए गए थे. अगर एक या दो कमरे में पानी भर भी जाए तो जहाज के बाकी हिस्से सुरक्षित रहें. इसी वजह से इसका प्रचार किया गया कि यह जहाज कभी नहीं डूबेगा. लोगों ने इस पर आंख बंद करके भरोसा कर लिया.

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14 अप्रैल 1912 की रात टाइटैनिक इंग्लैंड से अमेरिका जा रहा था. रात के अंधेरे में यह एक विशाल हिमखंड (Iceberg) से टकरा गया. जहाज की रफ्तार बहुत तेज थी. टक्कर के बाद जहाज के कई हिस्सों में दरार आ गई. कुछ ही घंटों में पानी तेजी से भरने लगा. महज 4 घंटे के अंदर यह विशाल जहाज समुद्र में समा गया.

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हादसे के समय जहाज पर लगभग 2200 लोग सवार थे, जिनमें यात्री और क्रू मेंबर शामिल थे. करीब 1500 लोगों की मौत हो गई, लाइफबोट्स की संख्या कम थी. सही समय पर मदद नहीं पहुंच पाई. यह हादसा आज भी दुनिया के सबसे भयानक समुद्री हादसों में गिना जाता है.

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टाइटैनिक डूबने के करीब 73 साल बाद, यानी 1985 में इसका मलबा मिला. यह अटलांटिक महासागर की गहराई में पड़ा है. समुद्र की सतह से करीब 12,500 फीट नीचे, कनाडा के न्यूफाउंडलैंड के पास, जहाज दो हिस्सों में टूट चुका था और चारों तरफ मलबा फैला हुआ है.

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